जिले में करीब दो पहले यानी दस मई के आसपास जब कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजीसे बढ़ी तो अपनों की जान बचाने के लिए परिवारीजन, तीमारदार डॉक्टरों का पर्चा लेकर दवा स्टाकिस्टों के यहां चक्कर काटने लगे। तब डॉक्टर का पर्चा, आधार के साथ देेने पर भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिल रहा था। कभी दबाव तो कहीं से जुगाड़ कर लोगों ने स्टाकिस्टों से इंजेक्शन खरीदे, संक्रमितों को लगवाए। ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा रही, जिन्होंने कहा कि उन्होंने मारामारी के दौर में कालाबाजार में रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे। आरोप लगे थे कि रेमडेसिविर इंजेक्शन लोगों की जरूरत के हिसाब से कालाबाजार में 20 से 30 हजार रुपये में बेचे गए। हल्ला मचा तो कई लोग इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़े भी गए, लेकिन सफेदपोश कालाबाजारी पुलिस की पकड़ से दूर ही रहे।
औषधि विभाग के मुताबिक जिले में रेमडेसिविर इंजेक्शन सिर्फ जरूरतमंदों को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराए गए। बिक्री का विवरण दर्ज कर शासन के साथ प्रशासन को दिया गया। अब हालात बदल गए हैं। थोक दवा विक्रेताओं के यहां विभिन्न ब्रांडों के रेमडेसिविर इंजेक्शन का भारी स्टाक जमा है। इनमें एक स्टाकिस्ट के पास तीन जिलों की डीलरशिप है। उनके यहां सर्वाधिक 45 लाख के इंजेक्शन डंप हैं। वहीं अन्य स्टाकिस्टों के पास भी 28 से 30 लाख के रेमडेसिविर इंजेक्शन गोदाम में पड़े हैं। स्टाकिस्ट इंजेक्शनों की एक्सपायरी तिथि से परेशान हैं।
बढ़ी मांग तो मंगाया भारी स्टाक, अब वापसी के प्रयास
जिले में पांच ऐसे स्टाकिस्ट हैं, जिनके पास रेमडेसिविर इंजेक्शन की डीलरशिप है। अलग-अलग दवा कंपिनयों के इन डीलरों ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब पांच सौ इंजेक्शन का आर्डर दिया तो उन्हें बामुश्किल 30 से 50 इंजेक्शन मिले। मांग और आपूर्ति का अंतर करीब डेढ़ महीने बना रहा। मई की 15 तारीख से आर्डर के मुताबिक इंजेक्शन तो मिले पर वापसी पर डीलरों ने कंपनियों के प्रतिनिधियों से बात नहीं की। संक्रमण की दर कम हुई, मरीज घटे पर रेमडेसिविर मंगाने का क्रम जारी रहा, जो वर्तमान में सिरदर्द संभावित भारी नुकसान का कारण बन रहा है। अब करीब एक महीने से इंजेक्शनों की बिक्री ठप है और कंपनियां बचे स्टाक की वापसी से कतरा रही हैं। दवा कारोबारियों के मुताबिक अभी इंजेक्शनों की एक्सपायरी में तीन से चार महीने एक्सपायरी डेट है। कंपनियों से बात चल रही है पर वापसी पर गोलमोल जवाब हैं। मेल पर लिखापढ़ी में कंपनियों के प्रतिनिधि बिक्री के बाद वापसी का निर्देश बताते हैं।