खाली बर्थ होने के बाद भी प्रतीक्षासूची के यात्रियों को जगह न मिलने जैसी शिकायतें जल्द ही दूर होने वाली हैं। टीटीई की मनमानी पर रोक लगाने के लिए रेलवे हैंड हेल्ड टर्मिनल का इस्तेमाल जल्द ही ट्रेनों में शुरू करने की तैयारी में जुटा है। व्यावसायिक रूप से इसके इस्तेमाल के लिए उत्तर रेलवे और क्रिस में इसकी तैयारियां चल रही हैं। पुराने हैंड हेल्ड टर्मिनल के सॉफ्टवेयर में सुधार और उच्चीकरण में जुटा है। इसके लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत पांच शहरों में डाटा सेंटर भी बनाए जा चुके हैं। बोर्ड ने 73 ट्रेनों में एचएचटी टर्मिनल्स को लागू करने की स्वीकृति दे रखी है। अब तक 15 ट्रेनों में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट सफल हो चुके हैं।
सामने खाली बर्थ होने के बाद भी प्रतीक्षासूची के यात्री खड़े रह जाते हैं और टीटीई आसानी से किसी न किसी को बर्थ बेच देते हैं। इसमें सुधार के लिए रेलवे प्रतीक्षासूची के यात्रियों को उनकी बारी पर बर्थ देने और नाट टर्नअप (यानी आरक्षण के बाद भी सफर न करने वाले) यात्रियों की जानकारी को अपडेट रखने की कोशिशों को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है। रेलवे अफसर बताते हैं कि ईएफटी के जरिए टीटीई के बर्थ आवंटन में पारदर्शिता आएगी। पीआरएस से जुड़ा होने के कारण टीटीई और स्टेशन कर्मचारियों के पास इसके जरिए फूड और आक्यूपेंसी चार्ट भी मौजूद रहेगा। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के बाद नए एचएचटी से टिकट भी दिए जा सकेंगे।
टिकटों की जांच के दौरान एचएचटी में नॉट टर्नअप बटन दबाते ही प्रतीक्षासूची के यात्री को खाली बर्थ मिल जाएगी। साथ ही यात्रा न करने वाले यात्री को रिफंड मिलने में आसानी हो सकेगी। अभी दावा करने के बाद रेलवे प्रशासन जांच कर महीनेभर में रकम लौटाता है। जीपीआरएस से जुड़ा एचएचटी में बीएसएनएल का नेटवर्क इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तर रेलवे के सीपीआरओ नीरज शर्मा का कहना है कि क्रिस पुराने सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा है। जल्द ही नई ट्रेनों में इसे लागू करने की तैयारी है।