चार सप्ताह में जांच पूरी करने का DSO को दिया आदेश
यह जान कर हैरान याची ने पता किया तो जानकारी मिली कि जिस कृषि भूमि का स्वामी याची के मजदूर पति को बताया जा रहा है वो राजस्व रिकार्ड में किसी दूसरे के नाम दर्ज है, इसी तरह जिस स्टेट बैंक में जमा लाखों रुपए, दिहाड़ी मजदूर के बताए जा रहे है, उस बैंक में उसका कोई खाता ही नही है।
सारी जानकारी इकट्ठा करने के बाद आपूर्ति विभाग द्वारा लखपति घोषित मजदूर परिवार वर्षो से सरकारी कार्यालयों में ये साबित करता घूम रहा है की वो लखपति नही दिहाड़ी मजदूर है। उसका परिवार राशन के अभाव में भुखमरी के कगार पर है, लेकिन उसकी किसी ने एक न सुनी।
अधिकारियों की परिक्रमा से थक चुकी याची ने अंत्योदय राशन कार्ड को पुनर्जीवित कर, राशन मुहैया कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका निस्तारित करते हुए जिलापूर्ति अधिकारी फतेहपुर को मजदूर परिवार द्वारा अंत्योदय राशन कार्ड के निरस्तीकरण के विरुद्ध दी गई शिकायत की जांच चार हफ्ते में पूरी करने का आदेश दिया है।