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Prayagraj News: अभियोजन की मंजूरी न प्रयोगशाला की रिपेार्ट, 26 साल बाद आरोपी बरी

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जिला अदालत ने 26 साल पुराने विस्फोटक अधिनियम के मामले से आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। ट्रायल के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पुलिस न जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी ले सकी और न ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट पेश कर पाई।
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1998 में प्रयागराज के घूरपुर में सुल्तान उर्फ समशाद के खिलाफ बम रखने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपी युवक के कब्जे से बम की बरामदगी दिखाते हुए पुलिस ने आरोप पत्र भी अदालत में दाखिल किया। 25 साल से लंबित मामले में 2023 में आरोपी ने अदालत में उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल कर दोषमुक्त करने की गुहार लगाई थी। याची कि अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी तत्कालीन डीएम ने नहीं दी है।
मामले की सुनवाई कर रही अपर सत्र न्यायाधीश कु0 अनीता प्रथम की अदालत ने पत्रावली के अवलोकन के दौरान पाया कि 26 साल बाद भी पुलिस, तत्कालीन डीएम की ओर से अभियोजन की चलाने की स्वीकृति हासिल नहीं कर सकी है। न ही आरोपी के कब्जे से कथित बरामद बम की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट ही पेश कर पाई है।
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कोर्ट ने कहा कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत बिना डीएम की पूर्वानुमति के ओरापी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। साथ ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के यह पता नहीं लगाया जा सकता कि बरामद बम विस्फोटक था या नहीं। कोर्ट ने आरोपी की ओर से दाखिल उन्मोचन प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए आरोपी युवक को निर्दोष करार दिया और 26 साल पुराने आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
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