पंद्रह दिन की अवधि पूरी होने के बाद दोनों की ओर से पीडीए को कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद तीन अप्रैल को अगला कदम उठाते हुए पीडीए ने दोनों के घरों के बाहर ध्वस्तीकरण का नोटिसें चस्पा करा दिया। इसमें उन्हें एक और बार पंद्रह दिन का अवसर दिया गया। मगर इस बार भी दोनों की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
चुप्पी साधे बैठा है पीडीए, उठ रहे सवाल
एक के बाद एक दोनों नोटिसों की मियाद पूरी हो जाने के बावजूद पीडीए ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। अतीक और उसके गुर्गों का भय कहें या कुछ और लेकिन पीडीए पूरे मसले पर चुप्पी साधे बैठा है। नोटिस के बावजूद कार्रवाई न किया जाना कार्यपद्धति पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। मगर पीडीए अधिकारी इस संबंध में कोई जवाब देने को तैयार नहीं हैं। जोनल सचिव अजीत सिंह से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि शीघ्र ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।