दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षा में पास कराने की गारंटी देने वाला राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) अब अपने ही दावे पर खरा नहीं उतर रहा है। बोर्ड की ओर से जून में घोषित दसवीं एवं बारहवीं के रिजल्ट में 67 फीसदी से अधिक परीक्षार्थियों का रिजल्ट नकल के आरोप में रोक दिया गया था। जांच के बाद अगस्त माह में जब दोबारा परिणाम जारी हुआ तो ये सभी परीक्षार्थी फेल रहे। एनआईओएस की ओर से फेल परीक्षार्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए कहा गया है।
साख बचाने के लिए बदला परिणाम
जांच में नकल का आरोप साबित होने पर एनआईओएस ने पूरे देश के केंद्रों के परिणाम में बदलाव कर दिया। इस सख्ती के बाद केंद्र व्यवस्थापकों के होश उड़े हैं। अभिभावकों ने केंद्र व्यवस्थापकों से सवाल किया कि आखिर में वह पास कराने की गारंटी कैसे दे रहे थे। एनआईओएस सेंटर चलाने वाले शहर के कई स्कूलों के प्रबंधकों ने बताया कि इस बार के रिजल्ट को देखने के बाद अब अभिभावक अपने बच्चों के
प्रवेश के लिए नहीं आ रहे हैं।
वहीं एनआईओएस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आलोक कुमार गुप्ता ने बताया कि जिन परीक्षार्थियों का रिजल्ट रोका गया था, उनकी कापियों की जांच दोबारा कराई गई। उन छात्रों को इसी सत्र में दोबारा परीक्षा देकर अगली कक्षा में जाने का अवसर दिया गया है। बताया कि कुछ परीक्षार्थियों की एक विषय की तो कुछ की दो-तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराकर जल्द रिजल्ट घोषित किया जाएगा।