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Prayagraj : सेना से अनापत्ति लेने में ही बीते नाै साल, लाइट मेट्रो परियोजना कैसे होगी साकार

Wed, 26 Mar 2025 11:35 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज में यातायात को सुगम बनाने के लिए लाइट मेट्रो संचालन की तैयारी फिलहाल सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। इसके तहत 44 किलोमीटर में मेट्राे काॅरिडोर का निर्माण दो चरणों में किया जाना है। पहले चरण में बमराैली से झूंसी स्थित सिटी लेक फाॅरेस्ट तक 23 किलोमीटर में 21 स्टेशन तैयार होने हैं।
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प्रयागराज लाइट मेट्रो प्रोजेक्ट। सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संगम नगरी के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी लाइट मेट्रो प्रोजेक्ट-2016 नाै साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। स्थिति यह है कि सेना से अनापत्ति के इंतजार में अब तक डीपीआर फाइनल नहीं हो सका है, जबकि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों की 35 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। सेना से अनापत्ति और स्थलीय निरीक्षण के लिए अधिकारियों की 18 मार्च को प्रस्तावित बैठक एकबार फिर स्थगित हो चुकी है, जबकि अगली बैठक की अभी तारीख तय नहीं हो सकी है।

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प्रयागराज में यातायात को सुगम बनाने के लिए लाइट मेट्रो संचालन की तैयारी फिलहाल सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है। इसके तहत 44 किलोमीटर में मेट्राे काॅरिडोर का निर्माण दो चरणों में किया जाना है। पहले चरण में बमराैली से झूंसी स्थित सिटी लेक फाॅरेस्ट तक 23 किलोमीटर में 21 स्टेशन तैयार होने हैं। दूसरे चरण में शांतिपुरम से छिवकी तक 21 किलोमीटर में 19 स्टेशन बनने हैं। 8125 करोड़ की यह परियोजना वर्षों बाद भी बैठकों तक ही सीमित है।

इसके लिए यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, कर्नल क्यू एचक्यू पूर्व यूपी एंड एमपी सब एरिया, रक्षा संपदा अधिकारी प्रयागराज और राइट्स लिमिटेड नई दिल्ली के ज्वाइंट जनरल मैनेजर की 18 मार्च को बैठक प्रस्तावित थी। इससे अधिकारियों को भी कार्य आगे बढ़ने की आस जगी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से स्थगित कर दी गई। बैठक में खासताैर पर काॅरिडोर के भूमि संरेखण स्टेशन एवं डिपो के लिए भूमि चिह्नित की जानी थी और रक्षा विभाग से अनापत्ति ली जानी थी।

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विदित हो कि प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष-2016 में शासनादेश जारी कर बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रणाली उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के विशेषज्ञ उपक्रम राइट्स लिमिटेड को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। राइट्स लिमिटेड ने डीपीआर की कंसल्टेंसी फीस 3.85 करोड़ और इसके अतिरिक्त प्रति किमी की लंबाई पर 11 लाख रुपये प्रति किमी की दर से प्रस्ताव रखा था, जिस पर न्यूनतम लंबाई हेतु 3.50 करोड़ और दस लाख प्रति किमी पर सहमति बनी। इसके अलावा नोडल एजेंसी प्रयागराज विकास प्राधिकरण के लिए भी दस लाख रुपये प्रति किमी की दर से कंसल्टेंसी फीस तय किया गया। उस दौरान सचिव वंदना त्रिपाठी और नगर नियोजक आरके सिंह थे। स्थिति यह है कि अब तक पूर्ण रूप से डीपीआर फाइनल नहीं हो सका हैं।

आयुक्त की अध्यक्षता में लिया गया था निर्णय

आठ सितंबर 2016 को तत्कालीन आयुक्त राजन शुक्ला की अध्यक्षता में आयुक्त शिविर कार्यालय में बैठक हुई थी, जिसमें मेट्रो परियोजना के संचालन के लिए फिजिविलिटी स्टडी (डीपीआर) के संबंध में निर्णय लिया गया। इसमें ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के रूप में बमरौली एयरपोर्ट से त्रिवेणी पुरम कालोनी झूंसी तक और नार्थ-साउथ काॅरिडोर के रूप में शांतिपुरम कालोनी फाफामऊ से अलोपीबाग होते हुए नैनी तक प्रथम चरण का चयन किया गया। दोनों कॉरिडोर के लिए 40 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी।

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राइट्स लिमिटेड से डीपीआर के लिए हुआ है अनुबंध : नवनीत

प्रयागराज विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता नवनीत कुमार शर्मा का कहना है कि भारत सरकार के विशेषज्ञ उपक्रम मेसर्स राइट्स लिमिटेड से डीपीआर के लिए अनुबंध हुआ है। इसके लिए लखनऊ मेट्रो कारपोरेशन को समन्वयक और प्रयागराज विकास प्राधिकरण को नोडल बनाया गया है। डीपीआर में अभी कुछ संशोधन होना है, इसके लिए जल्द ही बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें डीपीआर पर अंतिम मुहर लगने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा।

मेट्रो कॉरिडोर संरेखण एवं डिपो मैप स्टेशन तथा डिपो निर्माण के लिए चिन्हित भूमि को लेकर रक्षा विभाग से अपेक्षित सहमति के लिए 18 मार्च को बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कतिपय कारणों से यह टल गई है। जल्द ही बैठक कर रक्षा विभाग से अपेक्षित सहमति मिलने के बाद संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा और परियोजना को जल्द साकार करने का प्रयास किया जाएगा। - डा. अमित पाल शर्मा, उपाध्यक्ष प्रयागराज विकास प्राधिकरण

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