जिला अदालत में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब धोखाधड़ी के मुकदमे में पीड़ित की अर्जी पर कोर्ट ने थाने से रिपोर्ट तलब कर ली। पता चला कि कर्नलगंज थाने में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में अब तक नौ दरोगा विवेचना कर चुके हैं लेकिन विवेचना का एक भी पर्चा नहीं कटा। यहां तक कि केस डायरी का पता ही नहीं है। अब दसवें विवेचक वर्तमान में प्रकरण की विवेचना कर रहे हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र विवेचना पूरी कर परिणाम से कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है। यह आदेश स्पेशल सीजीएम प्रज्ञा सिंह ने पीड़ित के अधिवक्ता डीएस लाल को सुनने के बाद दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवेचना अनंत समय तक जारी नहीं रखी जा सकती है।
झलवा निवासी राकेश प्रकाश सिंह ने वर्ष 2014 में आईपीसी की धारा 419, 420 व अन्य के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सात साल बीत जाने पर भी में कोई कार्यवाही नहीं होने पर वादी ने न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें पूरे प्रकरण को विस्तार से बताते हुए पुलिस पर आरोप लगाया गया कि इस मामले में स्पष्ट आख्या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मंगाई जाए और विवेचक के विरुद्ध कार्यवाही की जाए। वादी की अर्जी पर कोर्ट ने प्रकरण के विवेचक से रिपोर्ट तलब की तब मामले का खुलासा हुआ। विवेचक ने अपनी आख्या में बताया है कि इस मामले की विवेचना 9 विवेचक कर चुके हैं। दसवें विवेचक वह स्वयं हैं लेकिन पूर्व में जितने भी विवेचकों ने केस डायरी के पर्चे लिखे हैं, एक भी पर्चा न उन्हें मिला है न उनके पूर्व के विवेचक को ही प्राप्त हुआ है।
प्रकरण में अब तक इन लोगों ने की विवेचना
विनोद कुमार सिंह, अवध बिहारी शुक्ल, गजानंद सिंह ,राजेंद्र सिंह ,संतोष कुमार सिंह ,वीरेंद्र प्रताप सिंह, दयाराम, चंद्रेश उपाध्याय ,लाखन सिंह इस मामले की विवेचना कर चुके हैं एवं राजेंद्र कुमार वर्तमान में कर रहे हैं।