झूंसी में शांतनु दुबे रात में घर से निकला था लेकिन फिर लौटकर नहीं आया। अगले दिन उसकी हत्या की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया। इस घटना ने रात में दोस्तों के साथ घूमने, किसी काम से निकलने या नाइट लाइफ एक्सप्लोर करने वाले किशोरों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नाइट लाइफ का मतलब जिंदगी को खतरे में डालना या जिंदगी खो देना नहीं है।
बदलती जीवनशैली में किशोरों को आजादी देना जरूरी है लेकिन इसके साथ उन्हें रात में सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने, अनजान लोगों और परिस्थितियों से सावधान रहने और खतरे को पहचानने की समझ देना भी उतना ही जरूरी है।
शहर में कंपनी बाग, स्टेशन रोड, कटरा, सिविल लाइंस, तेलियरगंज, चौक, अलोपीबाग, दारागंज, धूमनगंज समेत कई प्रमुख इलाकों में देर रात तक खानपान की दुकानें और क्लब-बार की गतिविधियां चलती रहती हैं।
इन स्थानों पर आने-जाने वालों की संख्या भी रहती है लेकिन देर रात किशोरों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी किसकी है यह सवाल उठता है। पुलिस गश्त, सीसीटीवी और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी के साथ अभिभावकों की सजगता भी जरूरी है।
दोस्तों के साथ घूमने या मिलने के लिए किशोर भी देर रात घर से निकलते हैं। कई बार दोस्त के बुलावे, अचानक बने कार्यक्रम या ऑनलाइन संपर्क के जरिये बाहर जाने की स्थिति बनती है।
ऐसे में परिवार को यह जानकारी होना जरूरी है कि उनका बेटा किसके साथ, कहां और कितनी देर के लिए बाहर गए हैं। अभिभावकों को बच्चों को केवल रात में बाहर जाने से रोकने के बजाय उन्हें सुरक्षा के नियम समझाने चाहिए।
बच्चों को डराएं नहीं, भरोसा कायम करें
नैदानिक मनोवैज्ञानिक पंकज कौटार्य कहते हैं कि किशोरावस्था में बच्चे दिन की अपेक्षा रात में ज्यादा स्वतंत्रता महसूस करने लगते हैं। दोस्तों के साथ घूमने और नाइट लाइफ को एक्सप्लोर करने की इच्छा भी बढ़ती है। इस उम्र में दोस्तों का प्रभाव भी अधिक होता है। ऐसे में अभिभावक यदि हर बात पर डांटेंगे या शक करेंगे तो बच्चा जरूरी जानकारी छिपा सकता है। इसलिए बच्चों से दोस्त की तरह बातचीत करना ज्यादा प्रभावी है। उन्हें यह भरोसा दिया जाना चाहिए कि गलती होने पर भी वे सबसे पहले परिवार को बता सकते हैं।
नाइट लाइफ हो लेकिन सेफ लाइफ के साथ...
कौटार्य बताते हैं कि रात में दोस्तों के साथ घूमना या शहर की गतिविधियों का हिस्सा बनना अपने आप में गलत नहीं है। सवाल सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत सतर्कता का है। किशोरों को आजादी के साथ सुरक्षा का पाठ पढ़ाना और पुलिस को प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर प्रभावी निगरानी रखना जरूरी है। नाइट लाइफ का मतलब जिंदगी खोना नहीं है। देर रात घर से निकलने वाले हर किशोर के लिए परिवार का भरोसा, पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान तीनों जरूरी हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर डायल-112 की मदद ली जा सकती है।
नाइट लाइफ में स्टंटबाजी का भी बढ़ा चलन
दोस्तों के साथ देर रात घूमने के दौरान किशोर और युवा सड़क पर स्टंटबाजी भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो और रील वायरल करने के चक्कर में तेज रफ्तार और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में ट्रैफिक पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल स्टंट के वीडियो के आधार पर एक फॉर्च्यूनर समेत चार कारों को चिह्नित कर सीज किया। किशोरों का कुछ सेकंड के रोमांच के लिए सड़क पर किया गया स्टंट खुद के साथ दूसरों की जान भी खतरे में डाल सकता है।
देर रात तक दुकानें खुलने पर क्यों ठोस कार्रवाई नहीं
शहर में देर रात तक दुकानें खुली रहने का सिलसिला भी किशोरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। सिविल लाइंस क्षेत्र में डीसीपी सागर जैन के निर्देश पर समय-समय पर क्लब-बार में छापा मारने और दुकानों को बंद कराने की कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद कई जगह देर रात तक दुकानें खुली रहती हैं। ऐसे में सवाल है कि तय समय के बाद भी दुकानें खुली रहने की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है। न पुलिस और न ही नगर निगम इस पर कोई ठोस कार्रवाई कर रही है।
अभिभावक रखें ये पांच सावधानियां
1. रात में बाहर जाने पर स्थान और साथ जाने वालों की जानकारी रखें।
2. अपने बच्चे के मोबाइल फोन पर आपातकालीन संपर्क नंबर सेव कराएं।
3. घर में आने में देरी होने पर अपने बच्चे से लगातार संपर्क में रहें।
4. फोन बंद होने या संपर्क टूटने पर इंतजार न करें, तत्काल तलाश शुरू करें।
5. बच्चों को सिखाएं कि खतरा होने पर पेट्रोल पंप, पुलिस बूथ या भीड़भाड़ स्थान पर जाएं।
केस-एक
15 मार्च 2025 को करछना में 17 वर्षीय इंटर का छात्र राजू उर्फ सूबेदार गांव में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने गया था। इसके बाद घर नहीं लौटा। अगले दिन गंगा किनारे उसका शव मिला।
केस-दो
सात नवंबर 2025 को घूरपुर के कांटी गांव में 15 वर्षीय किशोर की हत्या कर दी गई। वह अपने दोस्तों के बुलाने पर घर के बाहर गया था। पुलिस ने मामले में कई बिंदुओं पर जांच की थी।
केस-तीन
24 अगस्त 2025 को नैनी महेवा नई बस्ती का 11 वर्षीय बालक घर से सामान लेने निकला था। इसके बाद लापता हो गया। अगली सुबह घर से कुछ दूर खेत में उसका शव मिला। गले पर चोट के निशान थे।