15 अप्रैल को यदि लॉक डाउन खत्म होता है तो भी अदालतों में आम वादकारियों और वकीलों के प्रवेश को लेकर प्रतिबंध जारी रहेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की अदालतों व अधिकरणों के लिए अग्रिम दिशानिर्देश जारी कर दिया है। उनका कड़ाई से पालन कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव द्वारा अप्रैल को सभी जिला न्यायाधीशों ,पीठासीन अधिकारियों, कामर्शियल कोर्टों, अधिकरणों से कहा गया है कि यदि लॉकडाउन जारी रहता है तो 25 मार्च को जारी निर्देश का पालन जारी रखा जाए।
यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट की कोरोना वायरस से निपटने के लिए गठित कमेटी के दिशानिर्देशों के अनुसार जारी किए गए हैं। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालतों से कहा है कि अदालत खोलने से पहले सेनेटाइजेशन किया जाए। सीएमओ व डॉक्टरों की निगरानी में प्रतिदिन इसे जारी रखा जाए। केवल निर्णीत होने वाले या अति आवश्यक मुकदमों की ही सुनवाई की जाए। वकीलों से लिखित बहस ली जाए।
संभव हो वीडियो कान्फ्रेन्सिंग से सुनवाई हो। अदालत में चार कुर्सियां रखी जाए। किसी वादकारी को बहस करने से न रोका जाए, बशर्ते वह बीमार न हो। सभी मास्क जरूर पहनें। उचित दूरी रखें। मुकदमे की सुनवाई के बीच दस मिनट का गैप रखा जाए। नियमित केसों में तारीख दी जाए। परिसर में भीड़ का प्रवेश नही होगा। आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए। कोरोना वायरस के बचाव की गाइडलाइन का पालन किया जाए।
प्रयागराज हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश से अगले सप्ताह 15 से 17 अप्रैल तक हाईकोर्ट में बैठ कर मुकदमों की सुनवाई के लिए जजों की सूची जारी की गई है। इसमें सीनियर जजों को भी शामिल किया गया है। ये सभी जज अपने-अपने चैम्बरों में बैठकर मुकदमों का निस्तारण करेंगे।
इसमें दो डिवीजन बेंच भी बैठेगी। एक डिवीजन बेंच सिविल मामले को तय करने के लिए जस्टिस पंकज मितल की अध्यक्षता में बैठेगी तो दूसरी डिवीजन बेंच क्रिमिनल मामले की सुनवाई के लिए जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता में बैठेगी। इसके अलावा कई एकलपीठ को बैठाया गया है, जो लघु अपराध वाले जमानत अर्जियों की सुनवाई करेंगे । ये सभी जज अपने-अपने चैम्बरों में बैठकर मुकदमों का निस्तारण करेंगे। सभी एकल जजों के समक्ष मुकदमा ई- फाइलिंग से ही दाखिल होगा और सुना जाएगा।