फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पारे का कहर, दुबक गया शहर

Tue, 12 May 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार को चढ़े पारे ने जमकर कहर बरपाया। ऐसा कहर जिसके मारे दिन भर दुबका रहा सारा शहर। मौसम विज्ञानियों ने इस स्थिति की आशंका पहले ही जता दी थी। अपनी चाल बदल चुके सूरज ने आसमान से आग बरसाना शुरू कर दिया है। तमतमा रहे सूरज का असर  रहा कि सोमवार को दो डिग्री की छलांग लगाकर पारा 45.5 डिग्री पर पहुंच गया। जबकि न्यूनतम तापमान भी 27.2 से बढ़कर 29.8 पर पहुंच गया। पारे में अचानक बढ़ोत्तरी ने वायुमंडल में मौजूद नमी को भी सोख लिया।
विज्ञापन


एक दिन अधिकतम आर्द्र्रता जो 78 फीसदी थी घटकर 35 फीसदी यानी आधी से कम हो गई जबकि न्यूनतम आर्द्रता 15 फीसदी पर जा टिकी। बेतहाशा गर्मी व लू के जबरदस्त थपेडें ने शहरियों को बेहाल कर दिया। आलम यह रहा कि आग बरसा रही गर्मी में जो निकला वह झुलस गया। गर्मी के चलते 12 से लेकर चार बजे तक सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। जो लोग जरूरी काम से घरों से निकले थे वे छांव की ठांव ढूढ़ते रहे। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा का कहना है कि नम पुरवइया के कमजोर पड़ने से गर्मी ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में पारा 47 डिग्री के आसपास पहुंच जाय तो ताज्जुब नहीं।


आग बरसा रही तेज धूप तेज के साथ वातावरण से नमी अचानक गुम हो गई है। सोमवार दिन में जब पारा 45.5 पर था तो नमी केवल 17 फीसदी थी। इतनी तेज धूप में वातावरण से नमी गायब होना बड़ा खतरा है। नमी लगभग खत्म होने का नतीजा रहा कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई लोग अचेत हो गए। घंटाघर, बहादुरगंज, मुट्ठीगंज, कटरा, तेलियरगंज, अल्लापुर बाजार में दोपहर को राहगीर और खरीदार अचेत हुए। व्यापारी पानी पिलाकर, हवा करके उन्हें होश में लाए। गनीमत रही कि हीट स्ट्रोक नहीं हुआ वरना मुसीबत खड़ी हो जाती।
विज्ञापन



गर्मी चढ़ने के साथ ही एसी, कूलर ने भी दगा देना शुरू कर दिया है। सोमवार को जब पारा 45.5 डिग्री पहुंचा तो बंद कमरे में भी राहत नहीं मिली। बेतहाशा गर्मी के चलते कूलर  जहां फेल हो गए, वहीं एसी से भी कम ही राहत मिली।
बाहरी वातावरण का तापमान पिछले कुछ दिनों से 44 डिग्री के बीच टिके रहने का नतीजा है कि कमरे के अंदर का तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया है। शहर में ज्यादातर मकानों में कमरे छोटे हैं और उनमें सामान ज्यादा है जिसके कारण तापमान एक डिग्री ऊपर ही है। घनी बस्तियों में तापमान अन्य मोहल्लों के मुकाबले ज्यादा मारक हो गया है। चढ़ते तापमान और डरावनी उमस का नतीजा है कि भोर में भी लू का एहसास होने लगा है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें