दो सौ नमूनों की जांच की
प्रो.जयंत कुमार पति की टीम ने मिट्टी की शुद्धता और खनिजों की स्थिति का पता लगाने के लिए संगम नोज एवं आसपास के घाटों से कुल 200 नमूने एकत्र किए। इनमें महाकुंभ के पहले दिसंबर 2024 और महाकुंभ के बाद मार्च 2025 में लिए गए 100-100 नमूने शामिल हैं। इनके भौतिक और रासायनिक विश्लेषण में पाया गया कि करोड़ों की भीड़ के बावजूद खनिजों की सांद्रता में कोई खतरनाक बदलाव नहीं हुआ।
घातक वस्तुओं का नहीं मिला नामोनिशान
शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि शरीर और प्रकृति के लिए क्रोमियम, जस्ता, निकिल या कोबाल्ट संगम के नमूनों में खतरनाक स्तर पर नहीं हैं। आमतौर पर इन धातुओं की मात्रा बढ़ने से जलीय जीवन और मानवीय स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाता है पर संगम क्षेत्र में इनका नामोनिशान नहीं मिला।
मिला उल्कापिंडों के अंश जैसा कण
शोध के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पृथ्वी एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों को लोहे का एक अत्यंत सूक्ष्म गोलाकार कण मिला है। इसकी बनावट अंतरिक्ष से आने वाले मेटियोराइट (उल्कापिंडों) के अंश जैसी है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए टीम गहराई से विश्लेषण कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि यह प्राकृतिक है या मानव जनित गतिविधियों के कारण उत्पन्न हुआ है।
मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक मिलने से बढ़ी चिंता
शोध में एक चिंताजनक बात भी सामने आई है। संगम की मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक फाइबर (प्लास्टिक के बहुत महीन रेशे) पाए गए हैं। टीम का कहना है कि यदि समय रहते प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन नहीं किया गया तो भविष्य में यह जलीय जीवन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।