इस बीच नवगठित अखाड़े के संस्थापक सदस्यों और स्वामी वीरेंद्रानंद में खींचतान शुरू हो गई। नाराज स्वामी वीरेंद्रानंद ने नए बनेअखाड़े के महामंत्री या महामंडलेश्वर का पद लेने से इन्कार कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने पट्टाभिषेक समारोह के लिए अनंतमाधव मंदिर परिसर देने से भी इन्कार कर दिया। इससे रार बढ़ गई।स्थिति संभालने के लिए आदित्यानंद ने संगम नोज पर पट्टाभिषेक कराने के लिए पुलिस आयुक्त से अनुमति मांगी।
साथ ही पट्टाभिषेक रोकने के लिए धमकियां मिलने का भी आरोप लगाया। शनिवार को संगम नोज पर समारोह पर हर किसी की निगाहें लगी रहीं, लेकिन देर शाम तक वहां नव गठित अखाड़े के पदाधिकारी नहीं पहुंचे। वहीं, रात नौ बजे महामंडलेश्वर पद पर सात संतों के पट्टाभिषेक की तस्वीरें और वीडियो जारी कर समारोह की सफलता की खुशी जाहिर की गई। अखाड़े के संस्थापक ने कहा कि जल्द ही और जगद्गुरुओं व महंतों का भी अभिषेक किया जाएगा। पट्टाभिषेक पर अखाड़े के संरक्षक चेतन गिरि भी उपस्थित थे।
आदित्यानंद और चेतन गिरि पर कार्रवाई नहीं हुई तो हठयोग करुंगा - स्वामी वीरेंद्रानंद
अनंत माधव हनुमान मंदिर के महंत स्वामी वीरेंद्रानंद ब्रह्मचारी ने शनिवार को पंचदशनाम श्रीसंत गुरुदत्त अखाड़े के नाम पर महामंडलेश्वर बनाने और अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस कमिश्नर को पत्र दिया।
प्रेस रिपोर्टर क्लब में उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर अखाड़ा बनाने के नाम पर भ्रम फैलाने वाले चेतन गिरि और आदित्यानंद के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वह अन्न-जल त्याग कर हठयोग करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
स्वामी वीरेंद्रानंद ने कहा कि पट्टाभिषेक के लिए बिना उनकी अनुमति के लिए अनंत माधव हनुमान मंदिर का स्थल के रूप में चयन बड़ी साजिश का हिस्सा था। कुछ लोग मंदिर हड़पना चाहते थे। इसके लिए उनको महामंडलेश्वर बनाने और अखाड़े में महामंत्री का पद देने की बात की जा रही थी।