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नई जनसंख्या नियंत्रण नीति : महापौर समेत आधे पार्षद नहीं लड़ पाएंगे अगला चुनाव

Tue, 13 Jul 2021 06:48 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • नई नीति-जनसंख्या नीति के मसौदे को बिना संशोधन अगर कानूनी रूप दिया तो नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष समेत कई दिग्गज पार्षदों को लगेगा झटका, कुंवारे निश्चिंत
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यूपी की नई जनसंख्या नीति का ड्राफ्ट तैयार, 11 जुलाई को लागू करने की तैयारी - फोटो : Self
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विस्तार
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प्रदेश सरकार की जनसंख्या नीति के ड्राफ्ट ने अगर बिना संशोधन कानूनी रूप लिया तो महापौर समेत आधे पार्षद अगला नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। 80 सदस्यीय नगर निगम के मिनी सदन में पचास फीसदी पार्षदों के दो से अधिक बच्चे हैं। 17 ऐसे पार्षद भी हैं, जिनके चार से छह बच्चे हैं। सरकार के मसौदे में दो बच्चों से अधिक होने पर नगर निगम चुनाव लड़ने से रोक का मसौदा है। इस नए मसौदे से पार्षद परेशान हैं।

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नगर निगम चुनाव के करीब डेढ़ साल बचे हैं। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद अगले साल नवंबर या दिसंबर में निकाय चुनाव कराए जाएंगे। इस बीच सरकार की नई जनसंख्या नीति के मसौदे की जानकारी होने से पार्षदों में बेचैनी बढ़ी है। चर्चा शुरू हो गई है कि जनसंख्या बिल लागू हुआ तो कौन-कौन से दिग्गज पार्षद चुनाव मैदान से बाहर हो जाएंगे। यही नहीं पार्षद दलगत सीमाएं भूलकर बैठकें कर रहे हैं। 

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चर्चा उन नामों पर ज्यादा हो रही है, जो चुनाव मैदान से बाहर हो जाएंगे। इनमें सबसे पहला नाम शहर की प्रथम नागरिक महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी का है। महापौर अभिलाषा के तीन बच्चे हैं। दो बेटे और एक बेटी। इसी तरह नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष अखिलेश सिंह भी जनसंख्या बिल लागू होने पर नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। अखिलेश के चार बच्चे हैं, दो लड़के, दो लड़कियां। वहीं उनके कदम से कदम मिलाकर चलने वाले भाई पार्षद मिथिलेश सिंह निश्चिंत हैं। वह चुनाव लड़ पाएंगे क्योंकि मिथिलेश के सिर्फ दो बच्चे हैं। अगल बगल के वार्ड से भाई अखिलेश का वारिस कौन होगा, इस पर चर्चा घर में ही नहीं, वार्डों में होने लगी है।

पांच बार पार्षदी का मैदान मार चुके वरिष्ठ पार्षद अतहर रजा लाडले भी चुनावी रेस से बाहर हो जाएंगे। उनके दो से अधिक बच्चे  हैं। 24 ऐसे पार्षद हैं जिनके सियासी जीवन पर नए बिल की छाया पड़ सकती है। बिल लागू हुआ तो ये पार्षद दो से अधिक बच्चे होने के कारण नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इनमें 17 ऐसे पार्षद हैं, जिनके तीन से छह बच्चे हैं। 
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prayagraj news : नगर निगम - फोटो : prayagraj
पार्षदों के बीच चर्चा रही कि तीन से छह बच्चों वाले पार्षद कौन है, उनमें तसलीमुद्दीन, जिया उबैद, शबनम पत्नी नफीस नई नीति से प्रभावित होने वालों में शामिल हो सकते हैं। वहीं भाजपा के पूर्व कार्यकारिणी उपाध्यक्ष वरिष्ठ पार्षद रतन दीक्षित दो बेटियों के पिता हैं। वहीं पार्षद ओपी द्विवेदी के एक, कुसुमलता के दो, कार्यकारिणी सदस्य कमलेश तिवारी के दो बच्चे हैं। ऐसे में ये पार्षद नई नीति से प्रभावित नहीं होंगे। 

ये कुंवारे पार्षद फिलहाल निश्चिंत 
कुंवारे पार्षदों में सबसे पहले नाम अलोपीबाग क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह उर्फ दादा का है। जनसेवा में लगे दादा कमलेश ने शादियां तो बहुतों की कराईं पर खुद के कुंवारे ही हैं। इसी तरह पार्षद निक्की कुमारी और शिव कुमार भारतीया अभी तक कुंवारे हैं। चर्चा है कि  दोनों का विवाह तय हो गया है, नई जनसंख्या नीति लागू होने और अगले चुनाव तक फिलहाल उन्हें खतरा नहीं है। 

भाजपा, कांग्रेस पार्षद दल के नेता, सचेतक पर खतरा नहीं, सपा दल के नेता पर संकट
जनसंख्या नीति से भाजपा पार्षद दल की सचेतक किरन जायसवाल की सिसासी राह बाधित नहीं होगी। उनके दो बच्चे हैं। इसी तरह कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकुंद तिवारी भी अगला चुनाव लड़ने को ताल ठोंकने को तैयार हैं। वह लगातार रसूलाबाद वार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके सिर्फ एक बेटी है। वहीं सपा पार्षद दल के नेता अतहर रजा लाडले दो से अधिक बच्चे होने के कारण प्रभावित हो सकते हैं।
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