एसएसपी कार्यालय के साथ नया, पुराना मेला
प्रशासन कार्यालय भी होगा सील
मध्य कमान के लेफ्टिनेंट जनरल के निरीक्षण के बाद सेना का निर्णय
परेड क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के बाद ही माघमेला के लिए दी जाएगी जमीन
प्रयागराज। परेड क्षेत्र में निर्माण को लेकर जिला प्रशासन और सेना के बीच जारी गतिरोध रविवार को भी नहीं सुलझा। सेना के मध्य कमान के लेफ्टिनेंट जनरल राजेश राना के निरीक्षण के बाद रविवार को सेना ने अब तय किया है कि एसएसपी कार्यालय के साथ मेला प्रशासन के नए (आईसीसीसी) एवं पुराने कार्यालय को भी वह सील करेगी। सेना की ओर से यह कार्रवाई शीघ्र ही किए जाने की तैयारी है। इसके पूर्व परेड क्षेत्र में जहां कहीं भी अतिक्रमण है, उसे सेना हटाती रहेगी। इसके बाद ही माघ मेले के लिए प्रशासन को जमीन सेना सौंपेगी।
परेड मैदान पर बने एसएसपी कार्यालय को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सेना की ओर से इसे गिराने की तैयारी पिछले माह की गई थी। लेकिन जिला प्रशासन के अफसरों द्वारा मौके पर पहुंचने एवं वार्ता के बाद तब यह कार्रवाई स्थगित कर दी गई। इस बीच पुराने दस्तावेजों के आधार पर कहा गया कि प्रशासन का कार्यालय जिस भूखंड पर बना है, उसे गिराया नहीं जा सकता। तर्क दिया गया था कि रक्षा मंत्रालय की 1963 नियमावली से पहले ही भूखंड प्रशासन को दिया जा चुका है। उधर सेना का कहना है कि वहां बिना अनुमति के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर, एसएसपी कार्यालय आदि बना लिया गया, उसे भी गिराया जाएगा। हालांकि पहले उसे पीपी (पब्लिक प्रिमिसेज) एक्ट 971 के तहत सील किया जाएगा। इस बीच शनिवार की रात ही लेफ्टिनेंट जनरल राजेश राना प्रयागराज पहुंचे। इस दौरान सेना और जिला प्रशासन के अफसरों की बैठक भी हुई। रविवार को लेफ्टिनेंट जनरल ने परेड क्षेत्र का निरीक्षण भी किया। उन्होंने हनुमान मंदिर के आसपास किए गए स्थायी निर्माण को भी देखा। फिलहाल सेना ने तय किया है एसएसपी कार्यालय के साथ मेला प्रशासन के नए और पुराने कार्यालय को सील किया जाएगा। इसके पूर्व परेड क्षेत्र में जो अतिक्रमण है, उसे भी हटाया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के बाद सेना द्वारा माघ मेले के लिए जिला प्रशासन को जमीन देने की कार्यवाही की जा सकती है।
एसएसपी कार्यालय पर सेना के जवान तैनात
परेड क्षेत्र में बने एसएसपी कार्यालय पर सेना ने अघोषित तौर पर कब्जा कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि वहां सेना के दो जवान लगातार 24 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। हालांकि इसकी पुष्टि न ही सेना कर रही है और न ही जिला प्रशासन के अफसर। लेकिन लगातार दो जवानों की तैनाती यही कह रही है कि अब एसएसपी कार्यालय सेना की निगरानी में ही है।
बाढ़ का पानी बढ़ने के पूर्व से ही सेना हटा रही है अवैध कब्जा
परेड क्षेत्र की 80 फीसदी जमीन सेना की है। दस फीसदी जमीन रक्षा संपदा विभाग और दस फीसदी जमीन छावनी परिषद की है। बाढ़ आने के पूर्व जुलाई माह से ही सेना इस क्षेत्र से अवैध कब्जे को हटा रही है। यहां मेला बसाने के लिए प्रशासन सेना से जमीन लीज पर लेता रहा है। बताया जा रहा है कि एसएसपी दफ्तर जहां है, वह जमीन अस्थायी निर्माण के लिए सेना ने दी थी। लेकिन वहां स्थायी निर्माण करवा लिया गया। इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने ज्वाइंट सेक्रेटरी वर्क्स को पत्र लिखकर लिखा है। साथ ही लीज बढ़ाने की भी अनुमति मांगी है।
‘प्रशासन और सेना के बीच कोई गतिरोध नहीं है। माघ मेले की तैयारियां सुचारु रूप से चल रही हैं। ’ डा. आशीष गोयल, मंडलायुक्त प्रयागराज।