संगम की धरा साहित्य, संस्कृति का खजाना ही नहीं, बल्कि सियासी प्रतिमानों को भी गढ़ने में आगे रही है। यहां से एक-दो नहीं, सात प्रधानमंत्रियों का नाता रहा है। तीन प्रधानमंत्रियों की यह जन्मस्थली रही है तो चार ऐसे पीएम हैं, जिनको रचने, गढ़ने और फलक तक पहुंचाने में संगमनगरी का बड़ा योगदान रहा। शहर से जुड़े प्रधानमंत्रियों पर पेश है एक रिपोर्ट...
देश की सियासत में प्रयागराज का नाम हमेशा शिखर पर चमकता नजर आएगा। वजह है पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इस शहर की सबसे समृद्ध सियासी पाठशाला। अब जब देश में 18वीं लोकसभा चुनाव का डंका बज चुका है।
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भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा में टिकट के लिए दिग्गजों के बीच खींचतान बढ़ गई है। ऐसे में इस पाठशाला से तपकर खरा सोना के रूप में निकले उन नगीनों की चर्चा मौजूं हो जाती है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हों या महज सात महीने के लिए सत्ता संभालने वाले चंद्रशेखर या फिर कार्यवाहक पीएम रहे गुलजारी लाल नंदा। देश की तकदीर और तस्वीर संवारने में योगदान देने वाले इन दिग्गजों का इस धरती से सीधा नाता रहा है।
इलाहाबाद ईस्ट व फूलपुर से पंडित नेहरू तीन बार चुने गए थे सांसद
देश के पहले पीएम पं.नेहरू की यह शहर जन्मभूमि होने के साथ ही कर्मस्थली भी रहा है। वह पहली बार 1951 में इलाहाबाद ईस्ट सीट से सांसद चुने गए थे। फूलपुर संसदीय सीट से पंडित नेहरू दो बार सांसद चुने गए थे।
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करछना में लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया
पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री भी 1957 और 1962 का लोकसभा चुनाव इलाहाबाद सीट से जीत कर संसद पहुंचे थे। 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इलाहाबाद की करछना विधानसभा के उरुवा ब्लॉक में एक जनसभा में उन्होंने पहली बार देश को ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया था।
संगनगरी रही देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मभूमि
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मभूमि भी यही नगरी रही है। इंदिरा की फिरोज गांधी संग शादी यहीं आनंद भवन में ही हुई थी। उनके बचपन से लेकर शादी तक की कई निशानियां अब भी स्वराज भवन के अलावा आनंद भवन संग्रहालय में संजोकर रखी हैं।
कंप्यूटर युग की शुरुआत करने वाले पूर्व पीएम राजीव गांधी का इस शहर से गहरा लगाव रहा है। यही वजह थी कि अपने मित्र और फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन को उन्होंने इसी शहर से चुनावी मैदान में उतारा था। पीएम पद पर रहते हुए राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल के दौरान इस शहर के लिए कई काम किए। नैनी में हिंदुस्तान केबल फैक्टरी उनकी देन रही है।
कार्यवाहक पीएम गुलजारीलाल नंदा ने भी की इलाहाबाद विवि से पढ़ाई
दो बार देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त होने वाले गुलजारीलाल नंदा भी इलाहाबाद से जुड़े थे। उनकी शिक्षा इलाहाबाद से ही हुई थी। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर के बाद कानून की पढ़ाई की थी। साथ ही इस विश्वविद्यालय से वह शोधछात्र भी रहे।
वीपी सिंह का मांडा के राजपरिवार में हुआ था जन्म
पिछड़ों के उत्थान के लिए मंडल कमीशन लागू करने वाले आठवें प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह इसी शहर की गलियों की सियासी डगर से होकर निकले थे। मांडा राजपरिवार में उनका जन्म हुआ था। राजा मांडा की कोठी अब भले ही सियासी गलियारों में नेपथ्य का हिस्सा हो गई हो, लेकिन किसी दौर में वहां से देश की दिशा और दशा तय होती थी। वीपी सिंह ने भी इविवि से पढ़ाई की। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी रहे।
चंद्रशेखर ने यहीं से सीखा राजनीति का ककहरा
युवा-तुर्क के तौर पर जाने गए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की। चंद्रशेखर ने राजनीति का ककहरा इसी शहर में रहकर पढ़ा था।