सिविल लाइंस में सोमवार को उस वक्त जमकर हंगामा हुआ जब भाजपा विधायक और हाईकोर्ट कर्मी की गाड़ी में टक्कर हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कागजात मांगे तो गाड़ी चला रहे विधायक के भतीजे ने अभद्रता शुरू कर दी। इस पर पुलिस गाड़ी थाने ले आई। खबर फैली तो अफसरों के फोन घनघनाने लगे। हालांकि देर रात गाड़ी को सीज कर दिया गया। घटना महकमे में चर्चा का विषय बनी रही।
गैर जनपद के एक भाजपा विधायक सिविल लाइंस इलाके में रहते हैं। सोमवार को वह किसी काम से लखनऊ गए थे। शाम छह बजे के करीब हाईकोर्ट में तैनात एआरओ पल्सर बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान खुद को विधायक का भतीजा बताने वाला युवक सफारी गाड़ी बैक करने लगा। आरोप है कि उसकी लापरवाही से एआरओ की बाइक में ठोकर लगी और वह बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। एआरओ ने समझाया तो सफारी चला रहा युवक उनसे ही उलझ गया। उन्होंने 100 नंबर पर सूचना दी तो डायल 100 टीम और कुछ देर बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। थाने में तैनात दरोगा ने युवक से पूछताछ की तो वह उससे ही भिड़ गया। इस दौरान उसने धमकी भी दी कि ‘गाड़ी विधायक की है। सोच-समझकर कोई बात करना।’ दरोगा ने गाड़ी के कागजात मांगे तो युवक वर्दी उतरवाने की धमकी देने लगा। इस पर पुलिस सफारी थाने उठवा लाई।
विधायक की गाड़ी थाने लाए जाने की सूचना मिली तो पुलिस अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। उधर अफसरों के फोन भी घनघनाने लगे। सूत्रों की मानें तो मामला विधायक से जुड़ा होने के कारण अफसर भी बैकफुट पर आ गए। उधर थाने में तैनात वरिष्ठ पुलिसकर्मी भी दरोगा को ही दोषी ठहराने लगे। साथ ही गाड़ी छोड़ने के लिए तैयार भी हो गए। हालांकि मामला इसके बाद फंस गया। फोन कर युवक को गाड़ी ले जाने को कहा गया तो वह फिर पुलिस को ही धमकाने लगा। उसका कहना था कि मामला विधायक तक पहुंच गया है। ऐेसे में अब गाड़ी पुलिस को ही पहुंचानी होगी। इसके बाद उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई। कोई रास्ता न देख आखिरकार गाड़ी सीज कर दी गई।