तमाम रचनात्मक गतिविधियों के बीच नीलाभ से इलाहाबाद कभी नहीं छूटा। इसीलिए वह इलाहाबाद के विविध सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं पर निरंतर लिखते रहे। इलाहाबाद से जुड़ी उनकी सामग्री सिलसिलेवार विभिन्न समाचारपत्र और पत्रिकाओं में प्रकाशित भी होती रही हैं लेकिन इलाहाबाद के तमाम महत्वपूर्ण प्रसंग अब तक पाठकों तक नहीं पहुंचे हैं। अब इलाहाबाद से जुड़ी अनेक अप्रकाशित सामग्री भी संकलित करके प्रकाशित कराई जाएगी।
‘अमर उजाला’ से खास मुलाकात में नीलाभ की पत्नी भूमिका ने उनकी कृतियों सहित अनेक मुद्दों पर अपनी राय साझा की। कहा, उनकी विरासत को सहेजना और समेटना ही मेरा संकल्प है। वह भले ही इलाहाबाद को छोड़कर चले गए थे लेकिन यह शहर हमेशा उनके दिलों में धड़कता रहा। यहां बिताए गए समय को वह हमेशा जीते रहे, इसीलिए उन्हाेंने इलाहाबाद की सांस्कृतिक-सामाजिक विरासत पर लिखने का फैसला लिया था। इसके लिए उन्होंने इलाहाबाद के खास लोगों और स्थानों को सूचीबद्ध भी किया था। इसमें संगम, हीरा पंजाबी, छुन्नन गुरु, एंग्लो इंडियंस, सोनकर समाज आदि शामिल है। इसमें से कई विषयों पर उन्होंने लिखा जबकि कई विषयों पर नहीं लिख सके। इसी तरह लंदन में बिताए वक्त पर भी संस्मरण लिखने की तैयारी थी।
भूमिका ने कहा, इलाहाबाद की सांस्कृतिक विरासत के कई विषयों सहित ढाई नाटक, दो उपन्यास, सैकड़ों कविताएं और गजलें भी अप्रकाशित हैं, जिन्हें प्रकाशित करवाया जाएगा ताकि उनकी संपूर्ण रचनाएं पाठकों तक पहुंचे। उनकी याद में सम्मान की शुरुआत की भी योजना है।
चार अगस्त को कवि-अनुवादक नीलाभ की तेरहवीं पर उनकी पहली पत्नी सुलक्षणा के दोनों बेटे भी आएंगे। नीलाभ के बड़े बेटे अदम्य अश्क अमेरिका के बोस्टन शहर में रहते हैं और छोटे बेटा पुणे में। नीलाभ के भतीजे श्वेताभ ने बताया कि खुसरोबाग मार्ग स्थित आवास पर तेरहवीं में सभी परिजन शामिल होंगे। बड़े बेटे अदम्य बुधवार को दिल्ली पहुंच गए। आगे का कार्यक्रम अदम्य से बातचीत के बाद ही तय किया जाएगा।