प्रयागराज में ही है एनसीआर के दो सबसे पुराने रेल पुल
उत्तर मध्य रेलवे जोन की बात करें तो यहां कुल 26 बड़े और महत्वपूर्ण पुल हैं। एनसीआर जोन के सर्वाधिक दो पुराने ब्रिज प्रयागराज में ही हैं। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग के मेजारोड स्टेशन के पूर्व टोंस नदी पर बना यह पुल करछना और मेजा को जोड़ता है। यह एनसीआर का सबसे पुराना पुल है। वर्ष 1864 में इस पुल पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई। नैनी पुल से ज्यादा ट्रेनें टोंस नदी पर बने पुल से गुजरती हैं। इस पुल से हर रोज 150 से ज्यादा ट्रेनों की आवाजाही हो रही है। इसके अलावा कानपुर-झांसी रेलखंड में 01 अप्रैल 1886 को यमुना नदी में बना कालपी ब्रिज, झांसी-मानिकपुर रेलखंड पर बेतवा नदी पर 15 फरवरी 1889 एवं बीना-झांसी रेलखंड पर बेतवा नदी पर ही एक जनवरी 1889 को बने पुल पर रेल आवागमन शुरू हुआ।
पुल का नाम उम्र नदी सेक्शन
नैनी ब्रिज - 159 वर्ष - यमुना नदी - प्रयागराज-पंडित दीन दयाल उपाध्याय
टोंस ब्रिज - 160 वर्ष - टोंस नदी - प्रयागराज-पंडित दीन दयाल उपाध्याय
स्टैची ब्रिज - 116 वर्ष - यमुना नदी - टूंडला-आगरा सेक्शन
ब्रिज नं 162 - 148 वर्ष - यमुना नदी - टूंडला-आगरा फोर्ट सेक्शन
कालपी ब्रिज - 138 वर्ष - यमुना नदी - झांसी-कानपुर सेक्शन
हमीरपुर ब्रिज - 111 वर्ष - यमुना नदी - बांदा-कानपुर सेक्शन
बेतवा ब्रिज - 135 वर्ष - बेतवा नदी - मानिकपुर-झांसी सेक्शन
केन ब्रिज - 135 वर्ष - केन नदी - मानिकपुर-झांसी सेक्शन
चंबल ब्रिज - 143 वर्ष - चंबल नदी - आगरा-ग्वालियर सेक्शन
एनसीआर जोन के सभी पुलों की आधुनिकतम तकनीक से मॉनीटरिंग की जाती है। सभी पुलों पर वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम भी लगा हुआ है। जोन के सभी पुल सुरक्षित हैं। आगरा के स्टैची ब्रिज की रीगर्डरिंग भी कुछ वर्ष पूर्व करवाई गई थी। - डाॅ. अमित मालवीय, सीनियर पीआरओ, एनसीआर
भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को समर्पित हैं इंजीनियर्स डे
इंजीनियर्स डे देश के महान इंजीनियर और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को समर्पित है। 15 सितंबर को उनकी जयंती होती है, ऐसे में उनकी याद में उनके जन्मदिवस को इंजीनियर्स डे के तौर पर मनाया जाता है।