उन्होंने बताया कि प्रयागराज छिवकी, आगरा कैंट, मथुरा जंक्शन, आगरा फोर्ट, अलीगढ़, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, खजुराहो, इटावा, मिर्जापुर, टूंडला, बांदा, मुरैना, चित्रकूट एवं दतिया स्टेशन शामिल हैं। इन 14 स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए रेलवे द्वारा कंसलटेंसी एजेंसी का भी चयन कर लिया है।
एजेंसी द्वारा ही संबंधित स्टेशन के पुनर्विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इस माह केे आखिर तक मास्टर प्लान तैयार होने की उम्मीद है। मास्टर प्लान बनाने का काम एरिनेम एजेंसी को मिला है। एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित स्टेशनों के पुनर्विकास का बजट फाइनल होगा। इन स्टेशनों पर तमाम यात्री सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
इसमें लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लॉजा, रिटायरिंग रूम, एसी वेटिंग रूम, ग्रीन इनर्जी आदि की सुविधा रहेगी। इन सभी स्टेशनों को वर्ष 2060 की अनुमानित भीड़ के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा। इसमें मल्टीलेवल पार्किंग, दिव्यांग फ्रेंडली भवन, छत पर सोलर पैनल आदि भी रहेगा। इन 14 स्टेशनों के पुनर्विकास पर पांच हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
उत्तर मध्य रेलवे में प्रयागराज जंक्शन, ग्वालियर, कानपुर के साथ अब छिवकी समेत 14 अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों का भी पुनर्विकास होना है। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। प्रयागराज एवं ग्वालियर केे पुनर्विकास का टेंडर भी जारी हो गया है। - सतीश कुमार, महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे।