तिथि क्षय के चलते इस बार वासंतिक नवरात्रि आठ दिन का होगा। नवमी तिथि का क्षय होने की वजह से राम नवमी का पर्व अष्टमी को ही मनाया जाएगा। कलश स्थापन के साथ 18 मार्च को वासंतिक नवरात्रि के अनुष्ठान आरंभ होंगे। अखंड दीप जलाकर दुर्गा स्तोत्र के अलावा वर्ष भर के मंगल के लिए व्रत और अन्य अनुष्ठान किए जाएंगे। संगमनगरी में अलोप शंकरी माता, कल्याणी देवी, ललिता देवी के दरबारों को फूलों, लतरों से सजाया जाएगा।इन देवी दरबारों में आस्थावानों की भीड़ उमड़ेगी।
वासंतिक नवरात्रि की आठ तिथियों में नौ देवियों की आराधना की जाएगी। पहले दिन शैलपुत्री देवी की सविधि पूजा से नवरात्रि का आरंभ होगा। इसके लिए सनातनधर्मी परिवारों में कलश स्थापन के साथ ही दुर्गा सप्तशती के पाठ, सहस्त्रनाम अर्चन समेत अन्य अनुष्ठान होंगे। कलश स्थापन 18 मार्च को प्रतिपदा लगने के साथ सुबह 6:02 बजे से आरंभ हो जाएगा। इस बार कलश स्थापन के अलग-अलग चार मुहूर्त होंगे। सूर्योदय बेला से ही कलश स्थापन शुरू हो जाएगा। मध्याह्न काल में अभिजीत मुहूर्त में भी श्रद्धालु कलश स्थापना कर सकेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. भक्तराज पांडेय के अनुसार इस बार के विरोधकृत नव संवत्सर के उच्चारण के बाद वैदिक मंत्रों के साथ कलश स्थापन और कलियुग की सर्व मंगलकारिणी देवी दुर्गा का आवाहन होगा।
कलश स्थापन के मुहूर्त
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18 मार्च रविवार, प्रतिपदा तिथि
सुबह 6:02 बजे सूर्योदय बेला में प्रतिपदा तिथि के मीन लग्न में
प्रात: 7:21 से 8:58 तक मेष लग्न में
प्रात: 8: 58 से 10:45 तक स्थिर वृष लग्न में
अभिजीत मुहूर्त: 11:36 से 12:24 तक मिथुन लग्न में
चैत्र प्रतिपदा यानी 18 मार्च से शुरू हो रहे विरोधकृत नाम नव संवत्सर के राजा इस बार सूर्य होंगे। जबकि मंत्री की कमान शनि के हाथ होगी। राजा-मंत्री दोनों की ग्रह चाल में परस्पर शत्रुता होने की वजह से शासन सत्ता में मतभेद उभरेंगे। अंतरकलह और द्वंद की स्थिति बनी रहेगी। इस नव संवत के फलित के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया में भारत का मान बढ़ेगा। कहीं अत्यधित वर्षा होगी तो कहीं कम बारिश से सूखा पड़ेगा।
विरोधकृत नाम नव संवत्सर में विश्व बाजार में वर्चस्व पैदा होने के संकेत हैं। इस नव संवत के राजा प्रतिपदा लगने के साथ ही जिम्मेदारी संभाल लेंगे, लेकिन मंत्री शनि 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के दिन अपना सक्रिय होंगे। ग्रहों की स्थिति के अनुसार राजा-मंत्री में परस्पर शत्रुता का भाव है। इस वजह से ज्योतिषी मान रहे हैं कि शासन-सत्ता को मतभेद और परस्पर विरोध की स्थितियों से गुजरना होगा। कुछ पड़ोसी देशों से तनाव भी बढ़ने की आशंका है। ज्योतिषी भक्तराज पांडेय बताते हैं कि विरोधकृत नव संवतत्सर के फलित में विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ने के योग हैं। अधिकतम राष्ट्राध्यक्ष मैत्री के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं। सैन्य क्षमता बढ़ेगी। आयात-निर्यात में भी बढ़ोत्तरी होगी।