फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Navratri 2020 : ब्रह्म मुहूर्त में इस बार कलश स्थापना के योग नहीं, स्वाति नक्षत्र में होगा मां का आवाहन

Sat, 17 Oct 2020 03:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कल स्थापना मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त
11: 47 से 12:15 बजे तक
स्वाति नक्षत्र में इस बार होगी कलश स्थापना
 
विज्ञापन
नवरात्रि 2020 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जगत जननी की आराधना का शारदीय नवरात्र शनिवार से आरंभ होगा। इस बार ब्रहम मुहूर्त में या सुबह पौ फटने के बाद कलश स्थापना नहीं होगी। सुबह चित्रा नक्षत्र होने की वजह से कलश स्थापना नहीं की जा सकेगी। मां का आवाहन और कलश स्थापना इस बार अभिजीत मुहूर्त में दिन के11:47 बजे से आरंभ होगी। इसी के साथ सनातनधर्मी परिवारों में नवरात्र व्रत आरंभ होगा और घर-घर मां दुर्गा की नौ दिवसीय पूजा आरंभ होगी। 

विज्ञापन


अरसा बाद शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा के दिन प्रात: काल कलश स्थापना का योग नहीं है। इसकी वजह चित्रा नक्षत्र है। ज्योतिष की मान्यता के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति नक्षत्र में कलश स्थापना नहीं की जाती। ऐसे में 11:52 पर चित्रा नक्षत्र की समाप्ति के बाद अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना आरंभ होगी।

ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार अभिजीत मुहूर्त केदौरान स्वाति नक्षत्र में गुरु से युक्त धनु लग्न रहेगी। धनु राशि पर गुरु के होने से राहु की शांति के लिए यह सबसे उत्तम योग बनेगा। ऐसे में प्रतिपदा तिथि के अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण के साथ कलश स्थापना होगी। मां दुर्गा की नौ दिवसीय आराधना केे क्रम में नौ दिन तक मां के अलग-अलग रूपों का ध्यान किया जाएगा।

विज्ञापन

नवरात्रि - फोटो : social media

ऐसे करें मां दुर्गा का आवाहन

वेदियों पर कलश में गंगा जल भरकर मां दुर्गा का आवाहन करना चाहिए। इसके बाद नारियल को लाल चुनरी में रखकर रक्षासूत्र से बांधना चाहिए। फिर, गौरी,गणेश और नवग्रह पूजन के बाद मां की व्रतियों को मां की स्तुति करनी चाहिए। शारदीय नवरात्र के अनुष्ठानों के लिए इस बार कोरोना काल में घर-घर में तैयारियां की गई हैं। कोरोना से मुक्ति के लिए घरों से लेकर देवी मंदिरों तक नवचंडी पाठ स्तोत्र नाम जप किएजाएंगे।
विज्ञापन

navratri - फोटो : अमर उजाला

नौ तिथियों के नौ स्वरूप

प्रतिपदा को शैलपुत्री, द्वितीया को ब्रह्मचारिणी, तृतीया -चंद्रघंटा, चतुर्थी कुष्मांडा, पंचमी -स्कंदमाता, षष्ठी -कात्यायनी, सप्तमी- कालरात्रि, अष्टमी -महागौरी और नौमी को मां सिद्धिदात्री की होगी पूजा।

पुरुषोत्तम मास की पूर्णाहुति आज

इस बार चतुर्दशी तिथि के क्षय की वजह से पुरूषोत्तम मास के अनुष्ठानों की पूर्णाहुति शुक्रवार को अमावस्या तिथि में होगी। श्रीसूक्त मंत्र के साथ भगवान के द्वादश नामों का जप किया जाएगा। मां लक्ष्मी का ध्यान और पूजा करके अन्नदान के साथ इस व्रत की पूर्णाहुति की जाएगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें