प्रयागराज। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं महिला छात्रावासों की स्थिति को चिंताजनक बताया है। बुधवार को इविवि में गर्ल्स हॉस्टल की सुरक्षा एवं छात्राओं के लिए भोजन, मेस, स्वास्थ्य की स्थिति का जायजा लेने पहुंची आयोग की पांच सदस्यीय टीम विश्वविद्यालय में अव्यवस्था से काफी नाराज दिखी। हालांकि, इविवि प्रशासन ने आयोग की टीम को आश्वस्त किया है कि बताई गईं कमियों को जल्द दूर कर लिया जाएगा।
महिला आयोग की सदस्य डॉ. राजुल बेन देसाई के नेतृत्व इविवि के महिला छात्रावास से जुड़ीं शिकायतों की जांच करने आई टीम ने मंगलवार एवं बुधवार लगातार दो दिन तक कैंपस का भ्रमण किया। टीम के अन्य सदस्यों में राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता सचान एवं अनीता सिंह के साथ आयोग की अधिवक्ता प्रियंका कौशिक और शालिनी सिंह शामिल हैं। सदस्यों ने संबंधित पक्षों से उनकी समस्याएं सुनीं। बाद में मीडिया से बातचीत के दौरान महिला आयोग ने इविवि की वर्तमान स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया। कहा कि गर्ल्स हॉस्टल में बाहरी तत्व बेरोकटोक आ जा रहे हैं, विवि की ओर से इन पर कोई रोक नहीं है। कैंपस में महिला सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था न होने पर भी टीम ने चिंता जताई। वहीं, टीम की आपत्ति पर महिला छात्रावास में बुधवार को महिला सुरक्षा गार्ड तैनात हो गईं।
खाने की गुणवत्ता खराब, साफ पानी के लिए छह हॉस्टल में एक आरओ
महिला आयोग की टीम ने गर्ल्स हॉस्टल के मेस में खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाया। कहा कि भोजन अच्छा नहीं होने से आए दिन छात्राएं बीमार रहती हैं। हाल ही में छात्रावास में आयोजित रक्तदान शिविर में अधिकांश छात्राएं इसलिए रक्तदान नहीं कर सकीं क्योंकि उनका हीमोग्लोबिन 12 के मानक से कम था। ऐसे में पता चलता है कि खाने की गुणवत्ता कितनी खराब है। गर्ल्स हॉस्टल परिसर स्थित छह हॉस्टल में पानी के लिए मात्र एक आरओ लगा है। छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए छात्रावास में कोई डिस्पेंसरी तक नहीं है। टीम से छात्राओं ने यह भी शिकायत की कि शौचालयों में प्रकाश की व्यवस्था नहीं है।
अधीक्षिकाओं पर मनमानी का आरोप
छात्राओं ने आयोग की टीम के सामने गर्ल्स हॉस्टल की अधीक्षिकाओं पर मनमानी का आरोप लगाया। छात्राओं का आरोप था कि विवि के तीन प्रमुख हॉस्टल की अधीक्षिकाएं उनकी ओर से कोई आवाज उठाने पर उत्पीड़न करती हैं। आए दिन छात्रावास से निकालने और इविवि से नोटिस भेजने की धमकी देती रहती हैं। महिला आयोग ने इस पर अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजने की बात कही।
आंतरिक शिकायत कमेटी की रिपोर्ट नहीं देने पर नाराजगी
आयोग की टीम के सामने छात्राओं की शिकायतों के लिए विवि की ओर से यूजीसी के मानकों की अनदेखी करते हुए आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन समय से न करने का मामला भी उठा। बताया गया कि 2013 से कमेटी के गठन की सिफारिश के बाद इविवि की ओर से जुलाई 2019 में आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन किया गया। जुलाई से कमेटी की क्या फाइंडिंग रही, इस बारे में विवि के पास कोई जानकारी नहीं थी। महिला आयोग की टीम ने कहा कि विवि की ओर से गठित कमेटी मानक के अनुरूप नहीं है।
पीआरओ ने किया अभद्र आचरण, होगी शिकायत
सदस्य डॉ. राहुल बेन देसाई ने बताया कि विवि के अधिकारियों से बातचीत के दौरान पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार का आचरण आपत्तिजनक था। उन्होंने टीम के सदस्यों के साथ खराब आचरण किया। टीम ने सवाल उठाया कि पीआरओ का इविवि में अभी प्रोबेशन पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में कुलपति ने उन्हें कैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति दे दी। टीम ने पीआरओ के खराब आचरण के लिए उनकी शिकायत महिला आयोग की अध्यक्ष से करने की बात कही है।
महिला आयोग के अध्यक्ष के नाम शिकायती पत्र दिया
इविवि की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एवं शोध छात्रा ऋचा सिंह ने इविवि के अधिकारियों पर उनका शोध कार्य बाधित करने का शिकायती पत्र टीम को सौंपा। महिला आयोग की अध्यक्ष को संबोधित पत्र में ऋचा ने आरोप लगाया कि उनके शोध कार्य को रोकने की धमकी दी गई है। उन्होंने सुरक्षा उपलब्ध कराने, शोधकार्य पूरा होने तक छात्रावास में रहने देने की मांग की है। इविवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने भी महिला आयोग की सदस्य से कुलपति के खिलाफ शिकायत की है। आयोग से आए सदस्यों से मिलकर प्रियंका सिंह सहित कई अन्य छात्राओं ने अपनी बात रखी।