इस वक्त सविता रेलवे में बतौर टीटी पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर में तैनात थी। सविता के कोच विशाल सिंह ने बताया कि तीन मई की सुबह तकरीबन 8:00 बजे सविता साइकिल से रोहतक स्थित ग्राउंड पर जा रही थी। तभी पीछे से किसी तेज रफ्तार कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सविता बुरी तरह जख्मी हो गई। उसे अस्पताल ले जाया गया हालांकि कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
इधर, कविता के मौत की जानकारी परिजनों को हुई तो कोहराम मच गया। सभी रोते बिलखते झूंसी से रोहतक के लिए रवाना हुए। आठ मई की देर रात को उसका शव झूंसी के नीबीकला गांव पहुंचा। शव के पहुंचने पर परिवार में एक बार फिर रोना पीटना मच गया। बेटी के शव को देखकर मां फोटो देवी बिलख पड़ी। शव से लिपटकर वह खूब रोई। शुक्रवार की सुबह नीबी कला गांव के कछार में गंगा तट के किनारे बालू में सविता के शव को दफनाया गया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।
धाविका बिटिया की मौत से गांव में पसरा रहा मातम, नहीं जले चूल्हे
धाविका बिटिया सविता पाल की मौत से नीबी कला गांव में मातम पसरा रहा। विशेष रूप से जिस बस्ती में सविता का घर है, वहां के लोग गमजदा थे। ज्यादातर घरों में चूल्हे भी नहीं जले। एक साधारण से किसान परिवार की होनहार बेटी सविता पाल ने बेहद कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा के बल सभी मुकाम हासिल कर लिए थे। ग्रामीण बताते हैं कि वो जितनी बड़ी धाविका थी, उतनी ही मृदभाषी भी थी। गांव के बड़े बुजुर्ग हों या फिर छोटे, सभी के बीच वह बेहद लोकप्रिय थी। गांव के युवक और युवतियां उसे अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। सभी उसे के नक्शेकदम पर चलकर खेल में अपने गांव और शहर का नाम रोशन करना चाहते हैं। आज कविता के निधन सभी युवक और युवतियां भी गमगीन थे।