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Prayagraj : झूंसी की राष्ट्रीय महिला धाविका की रोहतक में सड़क हादसे में हुई मौत, परिजनों में मचा कोहराम

Fri, 09 May 2025 05:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

झूंसी थाना क्षेत्र के नीबीकला गांव की रहने वाली राष्ट्रीय धाविका सविता पाल (26) की तीन दिन पहले रोहतक में हुए एक सड़क हादसे में मौत हो गई। शुक्रवार की सुबह उसका शव रोहतक से झूंसी उसके पैतृक गांव नीबी कला में लाया गया तो परिजनों में कोहराम मच गया।
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सविता पाल। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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झूंसी थाना क्षेत्र के नीबीकला गांव की रहने वाली राष्ट्रीय धाविका 26 वर्षी सविता पाल की तीन दिन पहले रोहतक में हुए एक सड़क हादसे में मौत हो गई। शुक्रवार की सुबह उसका शव रोहतक से झूंसी उसके पैतृक गांव नीबी कला में लाया गया तो परिजनों में कोहराम मच गया। सुबह ही नीबीकला गांव के कछार में गंगा तट के किनारे उसके शव को बालू में दफना दिया गया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।                                                            

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झूंसी के नीबीकला गांव निवासी फूलचंद पाल खेती किसानी पर परिवार का भरण पोषण करते हैं। उनकी चार औलादों सुरेंद्र, कविता, धीरेंद्र और चौथे नंबर पर राष्ट्रीय धाविका सविता पाल थी। सविता की रुचि शुरू से ही खेल में थी। इसी दौरान उसने दौड़ को चुना और गांव से ही अपना अभ्यास शुरू किया। देखते हो देखते वह गांव से निकलकर पहले जिला और बाद में प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की दौड़ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने लगी। तकरीबन आठ साल पहले उसे 2017 में श्रीलंका के कोलंबो शहर में हुए साउथ एशिया प्रतियोगिता में सीनियर लेवल की क्रास कंट्री दौड़ में उसने नेशनल गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2022 में हुए सीनियर क्रास कंट्री दौड़ में उसने सिल्वर मेडल प्राप्त किया था।

इस वक्त सविता रेलवे में बतौर टीटी पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर में तैनात थी। सविता के कोच विशाल सिंह ने बताया कि तीन मई की सुबह तकरीबन 8:00 बजे सविता साइकिल से रोहतक स्थित ग्राउंड पर जा रही थी। तभी पीछे से किसी तेज रफ्तार कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में सविता बुरी तरह जख्मी हो गई। उसे अस्पताल ले जाया गया हालांकि कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

इधर, कविता के मौत की जानकारी परिजनों को हुई तो कोहराम मच गया। सभी रोते बिलखते झूंसी से रोहतक के लिए रवाना हुए। आठ मई की देर रात को उसका शव झूंसी के नीबीकला गांव पहुंचा। शव के पहुंचने पर परिवार में एक बार फिर रोना पीटना मच गया। बेटी के शव को देखकर मां फोटो देवी बिलख पड़ी। शव से लिपटकर वह खूब रोई। शुक्रवार की सुबह नीबी कला गांव के कछार में गंगा तट के किनारे बालू में सविता के शव को दफनाया गया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।       
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धाविका बिटिया की मौत से गांव में पसरा रहा मातम, नहीं जले चूल्हे

धाविका बिटिया सविता पाल की मौत से नीबी कला गांव में मातम पसरा रहा। विशेष रूप से जिस बस्ती में सविता का घर है, वहां के लोग गमजदा थे। ज्यादातर घरों में चूल्हे भी नहीं जले। एक साधारण से किसान परिवार की होनहार बेटी सविता पाल ने बेहद कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा के बल सभी मुकाम हासिल कर लिए थे। ग्रामीण बताते हैं कि वो जितनी बड़ी धाविका थी, उतनी ही मृदभाषी भी थी। गांव के बड़े बुजुर्ग हों या फिर छोटे, सभी के बीच वह बेहद लोकप्रिय थी। गांव के युवक और युवतियां उसे अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। सभी उसे के नक्शेकदम पर चलकर खेल में अपने गांव और शहर का नाम रोशन करना चाहते हैं। आज कविता के निधन सभी युवक और युवतियां भी गमगीन थे।
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