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Prayagraj : राष्ट्रीय शिल्प मेले का रंगारंग आगाज, मालिनी अवस्थी की सुरमयी प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

Mon, 01 Dec 2025 07:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में राष्ट्रीय शिल्प मेले का रंगारंग आगाज सोमवार से हो गया। लोक-परंपराओं और स्वदेशी कला के अद्भुत संगम का साक्षी बनी।
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राष्ट्रीय शिल्प मेले के उद्घाटन के मौके पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में राष्ट्रीय शिल्प मेले का रंगारंग आगाज सोमवार से हो गया। लोक-परंपराओं और स्वदेशी कला के अद्भुत संगम का साक्षी बनी। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दस दिवसीय ‘राष्ट्रीय शिल्प मेला 2025’ का शुभारंभ सोमवार को शिल्प हाट परिसर में भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ किया गया। एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करते हुए, देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक परिधानों और लोक-नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया। हर रंग में एकता, हर सुर में भारत की आत्मा साफ झलक रही थी।

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कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायमूर्ति जेजे मुनीर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। केंद्र निदेशक ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पिछले चार दशकों से लोक कलाओं की धरोहर को संरक्षित कर रहा है। स्वदेशी शिल्पों के माध्यम से आत्मनिर्भरता व राष्ट्रगौरव की भावना मजबूत होती है। इसलिए शिल्प मेला आज प्रयागराज का एक महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन बन चुका है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों से प्रेम और आत्मनिर्भरता ही व्यक्ति के रूप में हमारी और राष्ट्र के रूप में देश के स्वाभिमान को निर्मित करती है। 

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सुरों और लोकनृत्यों ने बांधा समां

सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ विपिन मिश्रा की शंख-डमरू वादन से हुआ। इसके पश्चात पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी ने मां गंगा को नमन करते हुए जब “मोरे राम जोगिनी बनूंगी” गाया तो पंडाल करतल ध्वनि से गूंज उठा।रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, मोरे अंगना भवानी आई , हो रामा हो रामा, “केसरिया बालम पधारो म्हारे देस,जैसे गीतों ने शाम को भक्तिरस व लोकधुनों की मिठास से भर दिया। राजा जनक के हारे भीड़ और होली खेले मसाने में और “सावन आया रे, मेघ छाए रे, प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

लोकनृत्यों की कड़ी में असम से आई स्वागता शर्मा एवं दल ने असम के पारंपरिक नृत्य बिहू की प्रस्तुति देकर वहां की माटी की सुगंध को बिखेरकर खूब तालियां बटोरी। मध्य प्रदेश से आए जुगल किशोर एवं दल ने जनक लियौ रघुरयिया अवध में बाजे बधाइयां गीत पर रगं-बिरंगे परिधान में  बधाई, नौरता नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों से खूब तालियां बटोरीं।

हरियाणा से आए प्रदीप कुमार बमनी और साथी कलाकारों ने फागुन आया रंग भरा गीत पर फाग नृत्य की प्रस्तुति देकर देवर भाभी के प्रेम को मंच पर जीवंत किया। झांसी से आई राधा प्रजापति एवं दल ने राई नृत्य की प्रस्तुति दी। वही रामबाबू यादव ने बिरहा भेजी राम को वन में रहले कैअव कारण, बनिके मनिहारी श्याम दौरी सिर पर धारी की प्रस्तुति दी। 
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