प्रयागराज। सड़क जाम कर नारेेबाजी कर बाधा पहुंचाने के लंबित मुकदमे में बुधवार को पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर ने स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए में सरेंडर कर जमानत अर्जी पेश की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली और जमानतें दाखिल करने पर रिहा कर दिया। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने अधिवक्ता कुंज बिहारी मिश्र को सुनकर दिया है।
घटना 15 मार्च 2011 की दारागंज थाने के अलोपीबाग चौराहे की है। वादी एसओ सुरेन्द्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि भाजपा नेता और पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर, उमेश द्विवेदी, राजेश पाठक सहित अन्य समर्थकों के साथ शास्त्री ब्रिज आलोपी बाग में सड़क जाम कर नारेबाजी करने लगे और पुलिस के जाम हटाने पर उग्र होकर लड़ाई करने पर उतारू हो गए। बचाव पक्ष की ओर से दी गई जमानत अर्जी पर कहा गया कि इस घटना से उनका कोई सरोकार नहीं है। राजनैतिक रंजिश के कारण झूंठा फंसा दिया है।
सामूहिक दुष्कर्म में दो को बीस साल की कैद
प्रयागराज। जिला न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आरोप साबित होने पर आरोपी विशाल गुप्ता और शिवम केसरवानी को 20-20 साल की कैद और दोनाें पर दो लाख 90 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि में से एक चौथाई राशि पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया है।
यह आदेश स्पेशल जज पाक्सो एक्ट आलोक कुमार शुक्ल ने वादी के अधिवक्ता केशरी चन्द्र द्विवेदी, दिनेश मिश्रा और एडीजीसी देवी शंकर मिश्र और श्रीप्रकाश शुक्ला को सुनकर दिया है। घटना 15 अप्रैल 2014 की उतरांव थाने की है। वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपनी पत्नी के साथ अपने भांजे की सगाई में चला गया था। घर पर उसकी पुत्री पीड़िता और अन्य बच्चे थे।
रात में अभियुक्त विशाल गुप्ता, शिवम केशरवानी और एक अन्य लड़का उसके घर के पीछे की तरफ से घुस आए और उसकी पुत्री के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उसकी सीडी बना ली। अभियुक्तगण ने पीड़िता को धमकी दी थी कि किसी से बताई तो वह सीडी को सोशल मीडिया में डाल कर उसका जीवन बर्बाद कर देगा। इसके बावजूद अभियुक्तों ने सीडी पीड़िता की ससुराल भेज दी थी और इसी वजह से पीड़िता का रिश्ता भी टूट गया। कोर्ट ने आईपीसी, पाक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत विशाल और शिवम को 20-20 साल की कठोर कैद और कुल दो लाख 90 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन ने आरोप साबित करने के लिए सात गवाह पेश किए। कोर्ट ने तीसरे आरोपी को बाल अपचारी घोषित कर उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी।
भानू निषाद हत्याकांड विवेचक के खेल से अभियुक्त को मिली जमानत खारिज
प्रयागराज। भानू निषाद हत्याकांड में विवेचक के खेल से हत्यारोपी प्रमोद निषाद को जमानत मिल गई। प्रमोद निषाद की जमानत अर्जी पर विवेचक द्वारा अभियोजन को भेजी गई रिपोर्ट और अन्य प्रपत्रों में उसके खिलाफ केवल जान से मारने की धमकी की धारा का ही उल्लेख किया था और इसी आधार पर उसे जमानत मिल गई थी। बाद में विवेचक ने हत्या और हत्या की साजिश की धाराओं में आरोप पत्र भेजा है। यह खुलासा तब हुआ जब प्रकरण के एक अन्य अभियुक्त गुड़वा उर्फ गुंजू निषाद की जमानत अर्जी सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश हुई। हालांकि जिला जज एके ओझा ने गुड़वा उर्फ गुजू की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अभियोजन का कहना है कि विवेचक ने प्रपत्रों पर ओवरराइटिंग कर धारा बढ़ाई है।
डीजीसी गुलाब अग्रहरि ने बताया कि उन्हाेंने विवेचक से स्पष्टीकरण मांगे जाने और उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने के लिए जिला जज और एसएसपी को पत्र लिख कर अवगत करा दिया है। घटना 29 मई 2019 की धूमनगंज थाने की है। आरोप है कि मृतक भानू निषाद को अभियुक्तगण मछली मारने के लिए ले गए थे और उसकी डुबोकर हत्या कर दी थी और लाश गंगा में बहा दी थी। 31 मई को भानू की लाश दारागंज के सोमेश्वर घाट पर मिली थी, जिसकी पहचान उसके भाई दीपक ने की थी। डीजीसी का कहना है कि प्रकरण में प्रमोद निषाद की जमानत अर्जी प्रस्तुत की गई थी। अभियोजन ने जमानत पर मामले के विवेचक से आख्या मांर्गी थी। विवेचक ने अभियुक्त के खिलाफ आईपीसी की धारा 506 का ही अपराध होने की की रिपोर्ट और अन्य प्रपत्र कोर्ट में दाखिल किया था, जिसके आधार पर कोर्ट ने 30 अगस्त को प्रमोद निषाद की जमानत मंजूर कर ली थी। कोर्ट में अभियुक्त गुडवा उर्फ गुंजू की जमानत अर्जी प्रस्तुत होने पर विवेचक द्वारा पेश की गई मूल केस डायरी और आरोप पत्र में धारा 506 की जगह ओवर राइटिंग करके उसके स्थान पर हत्या और हत्या की साजिश की धारा को बढ़ा दिया गया है। अभियोजन ने विवेचक के इस कृत्य से जिला जज और एसएसपी को अवगत कराते हुए कार्रवाई किए जाने के लिए पत्र लिखा है।