नैनो सेंसर से शरीर के भीतर
की बीमारियों का पता लगाएंगे
0 ट्रिपलआईटी में बृहस्पतिवार को ‘इंटरनेट आफ थिंग्स’ विषय पर कार्यशाला में वैज्ञानिकों का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ विषय पर शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने दावा किया कि मानव शरीर के लिए नैनो सेंसर विकसित करके शरीर के भीतर किसी भी बीमारी का पता किया जा सकता है। इसके लिए युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का आगे आने होगा।
बृहस्पतिवार को कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. पी नागभूषण ने कहा कि नैनो सेंसर को विकसित करके दवाओं को हम मानव शरीर के मलाशय के माध्यम से शरीर में डाल सकते हैं। मुंह से दवा जाने से शरीर में कई अंग प्रभावित होते हैं, पर मलाशय के माध्यम से दवा देने पर हम अंगों को कुप्रभाव से बचा सकते हैं। उन्होंने कहा की ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ के कारण स्वास्थ्य, सुरक्षा, व्यवसाय संचालन, औद्योगिकी प्रदर्शन और वैश्विक पर्यावरण और मानवीय मुद्दों में सकारात्मक बदलाव आया है। वर्तमान में वायरलेस संचार की दुनिया में ‘इंटरनेट आफ थिंग्स’ ने व्यापक लोकप्रियता पाई है। इसके फलस्वरूप ई-कॉमर्स, ई-हेल्थ, ई-एग्रीकल्चर, ई-इंडस्ट्री इत्यादि जैसे नए क्षेत्र उभरे हैं।
कार्यशाला के समन्वयक एवं संस्थान के कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. शिर्शू वर्मा ने वायरलेस सेंसर नेटवर्क (डब्ल्यूएसएन) प्रयोगशाला के बारे में बताया। निदेशक ने प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। डीन (आईपी एंड आरएम) प्रो. शेखर वर्मा ने बताया कि नई तकनीक से मरीजों को वर्तमान दौर में व्यक्तिगत बातचीत के साथ-साथ अनुकूलित उपचारों की उम्मीद बढ़ी है। सूचना प्रौद्योगिकी के विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेंद्र सिंह ने विभाग में चल रहे दर्जनों शोध के बारे में जानकारी दी। आईईईई के आयोजक सचिव डॉ. सतीश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।