कालिंदीपुरम निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट कर 98 लाख की ठगी में जिन खातों का इस्तेमाल हुआ, उनमें मजदूरों व किसानों के केवाईसी दस्तावेज लगाए गए। फर्म के नाम से खोले गए खातों में इन्हीं के दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और संबंधितों को प्रोपराइटर बताया गया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच-पड़ताल में ये बातें सामने आई हैं। फिलहाल, इन खातों के बारे में और जानकारी एकत्र की जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि जिन फर्माें के नाम से खाते खुलवाए गए, उनके पंजीकृत कार्यालय कहां स्थित हैं। इसका पता चलने के बाद पुलिस उन पतों पर भी जाकर जानकारी जुटाएगी। अफसरों का कहना है कि साइबर ठगी की वारदातों में पूर्व में भी ऐसी बातें सामने आई हैं कि रकम ट्रांसफर कराने में जिन खातों का इस्तेमाल किया गया, वह मजदूरों या किसानों के नाम पर खोले गए।
दरअसल, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को रुपयों का लालच देकर साइबर ठग उनके दस्तावेजों पर खाते खुलवाते हैं और फिर इनका डेबिट कार्ड, पासबुक आदि लेकर एक्सेस अपने पास ले लेते हैं। ऐसा करने के पीछे मकसद यह रहता है कि खातों को ट्रेस करने के बाद भी पुलिस सीधे उन तक नहीं पहुंच पाती। एक खास बात यह भी है जिन लोगों के नाम पर खाते खुलवाए जाते हैं, उनसे साइबर ठग गिरोह के सरगना सीधे कभी नहीं मिलते, बल्कि उनकी बी टीम या इसी तरह लालच देकर रखे गए एजेंट मिलते हैं। इससे भी पुलिस का उन तक सीधा पहुंच पाना आसान नहीं रह जाता। डीसीपी दीपक भूकर ने बताया कि विवेचना चल रही है।