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‘रहस्यवाद वह है जिसमें कोई रहस्य न हो’

Mon, 02 May 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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से‌म‌िनार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से रविवार को शुरू दिन दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठी में देश भर से जुटे दर्शनशास्त्रियों ने भारतीय दर्शन में प्रोफेसर रामचंद्र दत्तात्रेय रानाडे के योगदान पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता मद्रास विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोदावरीश मिश्र ने कहा कि सामान्यत: यह समझा जाता है कि रहस्यवाद वह सिद्धांत या अनुभव है जिसे दूसरों के समक्ष अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रोफेसर रानाडे ने यह स्पष्ट किया है रहस्यात्मक अनुभव को भलीभांति लोगों के साथ बांटा जा सकता है। इसका प्रमाण श्रुतियां हैं। इसके व्याख्याकारों ने रहस्यों की अनुभूति के माध्यम से परमज्ञान प्राप्त किया और सभी को उस अनुभव से परिचित कराया। इसलिए रहस्यवाद वह है जिसमें कोई रहस्य न हो।
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मुख्य अतिथि बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर जनक पांडेय ने प्रोफेसर रानाडे के जीवन पर प्रकाश डाला। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने कहा कि प्रोफेसर रानाडे ने रहस्यानुभृूति के आयाम को विस्तृत किया। यह अनुभूति ज्ञान की सर्वोच्च अवस्था है। तकनीकी सत्र में प्रोफेसर रामजी मिश्र ने कहा कि अपने को जानना उपनिषद का उद्देश्य है और प्रोफेसर रानाडे ने रहस्यवाद को ज्ञान के साधन के रूप में स्वीकार किया।

विभिन्न तकनीकी सत्र को शिलांग नार्थहिल यूनिवर्सिटी के बीके अग्रवाल, बीएचयू के प्रोफेसर सच्चिदानंद मिश्र, दिल्ली विश्वविद्यालय केप्रोफेसर वी.सुजाता राजू आदि ने संबोधित किया। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन संयोजक प्रोफेसर जटाशंकर ने किया। इस मौके पर प्रोफेसर पीके चटर्जी, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के प्रोफेसर मानेंद्र प्रताप सिंह, सागर मध्य प्रदेश के प्रोफेसर एडी शर्मा, गोवा के प्रोफेसर गोरखनाथ मिश्र, डॉ.अतुल कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।
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