दुर्घटना के बाद मुरी एक्सप्रेस के कोचों में फंसे तमाम यात्रियों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। ऐसे में आसपास के गांवों के लोग घायलों के लिए देवदूत बनकर पहुंचे। घायल कोचों में पड़े कराह रहे थे। साथ ही बाहर निकालने की गुहार लगाते हुए चीख-पुकार कर रहे थे, उसी दौरान आसपास के गांवों के युवक बड़ी संख्या में घटना स्थल पर पहुंच गए।
सबसे ज्यादा मुसीबत एस-3 और एस-4 कोच में फंसे यात्रियों की थी। पटरी से हटकर गड्ढे में पहुंच जाने से यात्री शीशा तोड़कर भी बाहर निकलने की स्थिति में नहीं थे। साथ ही तमाम यात्री एक दूसरे के ऊपर गिरे पड़े मिले। ग्रामीणों के मुताबिक युवकों ने यात्रियों को उनके बैग, झोला, अटैची, ब्रीफकेस के साथ बाहर निकाला। यात्रियों को आसपास बैठाया। कोचों से कूद पड़े यात्रियों को उनके परिजनों से मिलाने में मदद की।
इलाहाबाद जंक्शन पर कालका मेल छोड़कर मुरी एक्सप्रेस के जनरल कोच में सवार यात्री रंजीत कुमार के मुताबिक रेलवे की मदद दो घंटे बाद मिली। रेलवे की बचाव टीम के आने तक ज्यादातर घायल यात्री कोचों से बाहर निकल चुके थे। आसपास के ग्रामीणों की मदद से शीशे और खिड़कियां तोड़कर यात्री बाहर निकले।