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हाशिये पर कथा सम्राट के सपनों की शिक्षा

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Munshi Prem Chandra - फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने जिस समान शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना की थी, वह इस दौर में मीलों दूर छूट गई है। नई शिक्षा नीति-2019 से गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चे बेहतर पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे। यह नीति सिर्फ कारपोरेट जगत की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई लगती है। इस शिक्षा नीति से आम छात्र और भी हाशिये पर धकेल दिए जाएंगे। यह नीति मुंशी प्रेमचंद के शिक्षा संबंधी सपनों से मेल नहीं खाती। यह बातें मंगलवार को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में प्रेमचंद्र के शिक्षा संबंधी विचार’ विषयक विचार गोष्ठी में कही गईं। प्रेमचंद जयंती की पूर्व संध्या पर यह परिचर्चा साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था‘आखर’ व स्वराज विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित थी।
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विषय प्रवर्तन डॉ. सुधांशु मालवीय ने किया। मुंशी प्रेमचंद के शिक्षा संबंधी विचारों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौर की प्रस्तावित शिक्षा नीति कथा सम्राट के सपनों से मेल नहीं खाती। उन्होंने प्रेमचंद के विचारों पर आधारित शिक्षा नीति बनाने पर जोर दिया। अध्यक्षता कर रहे डॉ आरसी त्रिपाठी ने कहा कि लगता है कि नई शिक्षा नीति सिर्फ कारपोरेट वर्ग की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही बनाई गई है। इसमें सुधार किया जाना चाहिए। प्रो अली अहमद फातमी ने प्रेमचंद के शिक्षा व भाषा संबंधी विचारों पर रोशनी डाली। विनोद तिवारी का कहना था कि नई शिक्षा नीति के जन विरोधी प्रस्तावों को हटाया जाना चाहिए। इस मौके पर प्रो अनीता गोपेश, आक्टा के पूर्व अध्यक्ष डॉ आरपी सिंह, डॉ सुजाता रघुवंश, प्रो प्रणय कृष्ण ने भी विचार व्यक्त किए। धन्यवाद डॉ झरना मालवीय ने ज्ञापित किया। संचालन किया सुधीर ओझा ने।
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