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Prayagraj News: नगर निगम कार्यकारिणी पूरी, मिले छह नए सदस्य

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नगर निगम कार्यकारिणी बृहस्पतिवार को पूरी हो गई। मतदान के बाद छह नए सदस्यों का चुनाव हुआ। भाजपा से बगावत करके चुनाव लड़ने वाले कमलेश तिवारी को कुल सात उम्मीदवारों में सबसे कम मात्र छह वोट मिले और वह हार गए। भाजपा से ज्ञानेंद्र मिश्रा, सुनीता चोपड़ा, राममिलन, गुलाब सिंह और सपा से प्रेम शंकर, अब्दुल समद विजयी घोषित किए गए। मतदान में पार्षदों के अलावा दोनों सांसदों, महापौर व छह विधायकों ने भी लिया हिस्सा।
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कार्यकारिणी के कुल 12 में से छह सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। 14 जून को लॉटरी से इनका चुनाव किया गया था। इनके स्थान पर बृहस्पतिवार को चुनाव की प्रक्रिया पूरी की गई। भाजपा की ओर से ज्ञानेंद्र मिश्रा, सुनीता चोपड़ा, राममिलन व गुलाब सिंह प्रत्याशी घोषित किए गए थे। वहीं, सपा की ओर से प्रेम शंकर व अब्दुल समद को प्रत्याशी बनाया गया था।
इस तरह से दोनों प्रमुख दलों की ओर से कुल छह प्रत्याशी ही घोषित किए गए थे। ऐसे में सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा था, लेकिन सदन में इन छह उम्मीदवारों के अलावा भाजपा के कमलेश तिवारी ने भी दावेदारी की। उनके नाम का प्रस्ताव पार्षद भोला तिवारी ने रखा। अध्यक्षता कर रहे महापौर गणेश केसरवानी की ओर से 12:30 बजे तक नाम वापसी का मौका दिया गया, लेकिन कोई भी उम्मीदवार पीछे नहीं हटा।
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ऐसे में डेढ़ से पांच बजे तक मतदान कराया गया। 100 पार्षदों के अलावा दोनों सांसद, नगर निगम सीमा क्षेत्र से जुड़े छह विधायक व तीन चार एमएलसी नगर निगम सदन के सदस्य हैं। इनके अलावा महापौर का नाम भी मतदाता सूची में शामिल है। इस तरह से कुल 113 में से 108 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया।
इनमें 100 में 99 पार्षदों के अलावा पदेन सदस्य फूलपुर के भाजपा सांसद प्रवीण पटेल, इलाहाबाद से कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह, सपा एमएलसी डॉ.मान सिंह, भाजपा के डॉ.केपी श्रीवास्तव, भाजपा विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, गुरु प्रसाद मौर्य, पीयूष रंजन निषाद और सपा की गीता पासी ने मतदान में हिस्सा लिया। मंत्री नंद गोपाल गुप्ता, विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, एमएलसी बाबूलाल तिवारी और सुरेंद्र चौधरी शहर में नहीं थे। इसकी वजह से नगर निगम सदन का पदेन सदस्य होने के बावजूद मतदान में हिस्सा नहीं ले पाए। इसके अलावा एक पार्षद ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
कुल पड़े 108 में से छह मत अवैध घोषित कर दिए। दो पार्षदों ने तो मतदान पर उर्दू लिपि का इस्तेमाल किया था। इसकी वजह से मत अवैध घोषित कर दिए गए। इनमें से सबसे अधिक 22 वोट ज्ञानेंद्र मिश्रा को मिले। गुलाब सिंह को 18, सुनीता चोपड़ा को 17, राममिलन को 16, प्रेमशंकर को 12 और अब्दुल समद को 11 वोट मिले। महापौर ने इन्हें निर्वाचित घोषित किया। वहीं, एक अन्य प्रत्याशी कमलेश तिवारी को छह वोट ही मिले। इस दौरान सदन के बाहर भाजपा के शहर अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा, सपा के संदीप यादव, विनय कुशवाहा समेत दोनाें दलों के अनेक नेता मौजूद रहे।
उम्मीदवारों के सामने सील किया गया बॉक्स
प्रत्याशियों के नाम घोषित होने के बाद कुल 113 मतदान पत्र तैयार किए गए। वोट बॉक्स में डाले गए। इससे पहले सभी प्रत्याशियों की मौजूदगी में बॉक्स का परीक्षण किया गया। फिर उसे सील किया गया।
कमलेश और भोला तिवारी भाजपा से छह साल के लिए निष्कासित
प्रत्याशी नहीं घोषित किए जाने के बावजूद कार्यकारिणी सदस्य के चुनाव में दावेदारी करने पर कमलेश तिवारी व उनके नाम का प्रस्ताव रखने वाले भोला तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ भाजपा से निष्कासित कर दिया गया है। महानगर अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि पार्टी की ओर से घोषित चार प्रत्याशियों के पक्ष में व्हिप जारी किया गया था, लेकिन कमलेश भी चुनाव लड़े। इनके नाम का प्रस्ताव भोला तिवारी ने रखा था। इसलिए दोनों पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। महानगर अध्यक्ष ने बताया कि भाजपा के चार पार्षदों ने इनके पक्ष में वोट किया है। उन्हें भी नोटिस जारी किया गया है।
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