शान से उठी सलीम पहलवान की मेहंदी
प्रयागराज। माहे मुहर्रम की तीन तारीख यानी मंगलवार को ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी की ओर से पूरी शान के साथ रसूलपुर का अलम का जुलूस निकाला गया। ताजियादार निसार अहमद खां की सरपरस्ती में रसूलपुर का अलम का जुलूस आरंभ हुआ। रसूलपुर,मीरापुर होते हुए सभी दरियाबाद कब्रिस्तान पहुंचे, जहां से मिट्टी लेकर सभी गोलपार्क के रास्ते लौटे। इस दौरान या अली, या हुसैन की मातमी सदाएं गूंजती रहीं। फरेरा और ढोल ताशे के साथ निकले जुलूस में असलम, इरशाद, वसीम खां, मुश्ताक खां, इफ्तेखार खां आदि शामिल थे।
वहीं पूरी शान के साथ अजीम पहलवान की सरपरस्ती में सब्जीमंडी, झूला इमामबाड़े केसामने से सलीम पहलवान की मेहंदी उठी। मेहंदी का जुलूस कदीमी रास्ते सब्जी मंडी, नखास कोहना, सेवंई मंडी, कोतवाली, बजाजा पट्टी, घंटाघर, सब्जीमंडी होते हुए इमामबाड़े पर लाकर रखी गई। मेहंदी में गुलाम रसूल, निसार अहमद खां, डॉ.मोहम्मद असलम, गुलाम अहमद, इरशादउल्ला, शिवगोपाल गुप्ता, रामबाबू चौरसिया आदि शामिल थे।
पूरे एहतराम से निकला दरियाबाद का जुलूस
प्रयागराज। इमामबाड़ा हुसैन अली खां का दो सौ बरस पुराना कदीमी जुलूस तीन मुहर्रम को दरियाबाद से निकाला गया। इसके साथ अलम, ताबूत, जुलजनाह की शबी भी शामिल थी, जिस पर लोगों ने फूल चढ़ाकर खिराजे अकीदत पेश किया। अंजुमन-ए-हाशिमिया के मातमदार मातम करते हुए चले। नौहाख्वान साहिबेबयाज डेजी और अर्शी ने मंजर की दास्तां बताई। डॉ.कमर इलाहाबादी के कलाम के साथ जुलूस इमामबाड़ा पहुंचकर पूरा हुआ। जुलूस का संचालन जौरेज हैदर जबकि इमामबाडे़ के मुंतजिम मुतवल्ली मजंर अली ने शुक्रिया अदा किया।