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‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ हैं विकास

Sat, 28 Mar 2015 01:35 AM IST
अमित सरन/ अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद। विदेश मंत्रालय का प्रवक्ता बनाए जाने पर विकास स्वरूप के परिवार में खुशियों का माहौल है। खबर मिलने के बाद से ही उनके जार्ज टाउन स्थित आवास पर बधाइयों का तांता लगा हुआ है। मां इंद्रा स्वरूप और पिता विनोद स्वरूप की खुशी का ठिकाना नहीं है। मां इंद्रा पूरे गर्व से कहती हैं, विकास ने हमें नई पहचान दी है। तमाम लोग उसकी वजह से ही जानने लगे हैं। किसी भी माता-पिता के लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है लेकिन विकास हर काम को बहुत जिम्मेदारी से निभाता है, यह उसकी सबसे बड़ी खूबी है। बता दें विकास के बहुचर्चित उपन्यास ‘क्यू ऐंड ए’ पर बनी मशहूर फिल्म ‘स्लम डॉग मिलियनेयर’ को आठ श्रेणियों में ऑस्कर अवार्ड मिला था। उनकी एक अन्य पुस्तक ‘एक्सीडेंटल अप्रेंटिस’ पर भी जल्द ही हिन्दी में फिल्म बनने जा रही है।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत में मां ने विकास से जुड़ी तमाम स्मृतियां सहेजीं। कहा, वह हर काम को पूरी जिम्मेदारी से करना चाहता है। कभी जब उसके मन के मुताबिक काम नहीं होता तो नाराज भी हो जाता है। वह हर काम को सौ फीसदी करने में विश्वास रखता है। पुरानी बातें याद करें तो हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान उसने आनंद भवन में होने वाली एक भाषण प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए आवेदन तो किया लेकिन तैयारी न होने से अपना आवेदन वापस लेना चाहा था। प्रतियोगिता के संयोजकों ने ऐसा नहीं किया तो उसने पूरी तैयारी से प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पहला पुरस्कार हासिल किया।

मां बोलीं, ऐसे ही वह 1986 में जब आईएफएस में चयनित हुआ तो उसकी पहली ज्वाइनिंग टर्की में हुई। टर्की के लिए वहां की भाषा जाननी जरूरी थी। फिर क्या, विकास जुट गए और उन्होंने भाषा पर पूरी पकड़ बनाते हुए इस मामले में सौ फीसदी अंक अर्जित किया। पिता और हाईकोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता विनोद स्वरूप ने भी विकास के काम और व्यवहार के बारे में कई बातें साझा कीं। कहा, उस पर दादा जगदीश स्वरूप का भी प्रभाव है, वह उनके साथ लंबे समय तक रहा। दादा 1969 से 72 तक सॉलिसीटर जनरल रहे। फोन पर बातचीत में पत्नी अर्पणा ने भी कहा कि नई जिम्मेदारी से विकास खुश हैं। उनके लिए कभी कोई काम न बड़ा रहा, न छोटा, बस उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया। नई जिम्मेदारी भी वह पूरी शिद्दत से निभाएंगे।
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