शिक्षिका से एक मिनट 16 सेकेंड हुई थी बात
शिखा की मकान मालकिन सविता ने बताया कि 8 सितंबर को पलक घर पर अकेली थी। मां के कहने पर उन्होंने अपने फोन से करीब साढ़े 11 बजे पलक की बात उसकी शिक्षिका से कराई थी। एक मिनट 16 सेकेंड की बातचीत में पलक सिर्फ यस मैम, नो मैम और सॉरी मैम ही कहती रही। कॉल कटने पर पलक फोन लौटाकर अपने कमरे में चली गई। करीब एक बजे उसका छोटा भाई स्कूल से लौटा तो वह फंदे पर लटकी तड़पती दिखी। भाई की चीख सुनकर वह अपने पति के साथ कमरे में पहुंचीं और तुरंत उतारा। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस अधिकारी बनना चाहती थी पलक
पढ़ाई में होशियार पलक पहले डॉक्टर बनना चाहती थी। किसी से उसे मालूम चला कि इस पढ़ाई में खर्च बहुत आता है तो उसने विचार त्याग दिया। फिर, उसने पुलिस अधिकारी बनने की ठानी। डबडबाई आंखें लिए शिखा बताती हैं कि बेटी कहती थी कि उनका सारा जीवन दूसरों के घर चौका-बर्तन करते हुए बीत रहा है। जब वह बड़ी हो जाएगी तो यह सब करने की जरूरत नहीं रहेगी। एक अच्छा घर बनाएंगे, जहां सारी सुख-सुविधाएं होंगी। बेटी के साथ अब सारे अरमान भी खत्म हो गए।