राजेंद्र ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम से पहले एक कर्मचारी ने शव की शिनाख्त के लिए अंदर बुलाया। आरोप है कि ठीक से चेहरा नहीं दिखाया गया और इसके बाद शव का पोस्टमार्टम करने और सिलाई व सफाई के नाम पर 1100 रुपये ले लिए गए। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव लेने के लिए बुलाया गया। अंदर जाकर चेहरा देखा तो पता चला कि शव उनके ससुर का नहीं है।
इसकी सूचना वहां के प्रभारी व कर्मचारियों को दी गई। तब पता चला कि फतेहपुर में तैनात कानपुर के रेल कर्मी जितेंद्र केसरवानी के परिजनों को अवधेश का शव दे दिया गया है और वे लोग शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस से पांच किमी दूर सुलेमसराय तक पहुंच चुके हैं। इसके बाद उन्हें वापस बुलाया गया। तब जाकर दोनों पीड़ित परिवारों को अपनों के शव मिल सके।
ट्रेन की चपेट में आने से हुई रेलकर्मी की मौत
फतेहपुर खागा निवासी जितेंद्र केसरवानी (40) मूलरूप से कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के झकरकटी के रहने वाले थे। वह खागा में रेलवे में गैंगमैन के पद पर कार्यरत थे। भाई सुरेंद्र ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 11 बजे उनके भाई सत्य नरैनी के पास रेलवे लाइन पर काम कर रहे थे। इसी दौरान कालिंदी एक्सप्रेस आ गई जिसकी चपेट में आने से उनके सिर में गंभीर चोटें आईं।
विभाग के लोग उन्हें पास के नजदीकी अस्पताल ले गए जहां से उन्हें एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां लाने के दौरान रास्ते में ही उनके भाई की मौत हो गई। सुरेंद्र ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रेन की लाइन बदलने से उनके भाई की जान चली गई। विभाग के लोग समय पर उनके भाई का प्राथमिक उपचार भी नहीं करा सके। रूमाल से सिर बांध कर उन्हें प्रयागराज लाया जा रहा था। ज्यादा खून बहने की वजह से उनके भाई ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बृहस्पतिवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर कानपुर रवाना हो गए।