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Prayagraj : मर्चरी का गजब हाल - पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को दे दिया दूसरे का शव, लापरवाही पर फूटा गुस्सा

Thu, 20 Nov 2025 05:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) के पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों की लापरवाही आए दिन लोगों को आश्चर्य चकित करती है। इनकी लापरवाही के चलते दुखी परिजनों की परेशानी और भी बढ़ जाती है। ताजा मामला बृहस्पतिवार का है।
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राजेंद्र कुमार, जौनपुर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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एसआरएन अस्पताल परिसर में स्थित पोस्टमार्टम हाउस में बृहस्पतिवार को दोपहर बाद उस समय अफरातफरी मच गई जब जौनपुर और कानपुर के रहने वाले दो लोगों के शवों की आपस में अदला-बदली हो गई। जौनपुर के परिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव मिला तो चेहरा देखकर पर वह लोग दंग रह गए। उन्हें किसी और का शव दे दिया गया था। इस पर परिवार के लोग आक्रोशित हो उठे।

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इसके बाद कर्मचारी ने तुरंत एंबुलेंस चालक को फोन कर जौनपुर के युवक का शव लेकर जा रहे कानपुर के परिवार को वापस बुलाया। वहीं जौनपुर के युवक के परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों पर लापरवाही व पैसे वसूलने का आरोप लगाया है।

अवधेश कुमार उमरवैश्य (57) जौनपुर के मीरगंज के रहने वाले थे। उनके दामाद राजेंद्र कुमार ने बताया कि 18 नवंबर को बाइक से जाते समय जौनपुर के सतहरिया के पास अज्ञात वाहन ने ससुर को टक्कर मार दी थी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। एसआरएन अस्पताल में बुधवार शाम इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वह किराने की दुकान चलाते थे। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे व तीन बेटियां हैं।

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राजेंद्र ने बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम से पहले एक कर्मचारी ने शव की शिनाख्त के लिए अंदर बुलाया। आरोप है कि ठीक से चेहरा नहीं दिखाया गया और इसके बाद शव का पोस्टमार्टम करने और सिलाई व सफाई के नाम पर 1100 रुपये ले लिए गए। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव लेने के लिए बुलाया गया। अंदर जाकर चेहरा देखा तो पता चला कि शव उनके ससुर का नहीं है।

इसकी सूचना वहां के प्रभारी व कर्मचारियों को दी गई। तब पता चला कि फतेहपुर में तैनात कानपुर के रेल कर्मी जितेंद्र केसरवानी के परिजनों को अवधेश का शव दे दिया गया है और वे लोग शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस से पांच किमी दूर सुलेमसराय तक पहुंच चुके हैं। इसके बाद उन्हें वापस बुलाया गया। तब जाकर दोनों पीड़ित परिवारों को अपनों के शव मिल सके।
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ट्रेन की चपेट में आने से हुई रेलकर्मी की मौत

फतेहपुर खागा निवासी जितेंद्र केसरवानी (40) मूलरूप से कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के झकरकटी के रहने वाले थे। वह खागा में रेलवे में गैंगमैन के पद पर कार्यरत थे। भाई सुरेंद्र ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 11 बजे उनके भाई सत्य नरैनी के पास रेलवे लाइन पर काम कर रहे थे। इसी दौरान कालिंदी एक्सप्रेस आ गई जिसकी चपेट में आने से उनके सिर में गंभीर चोटें आईं।

विभाग के लोग उन्हें पास के नजदीकी अस्पताल ले गए जहां से उन्हें एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां लाने के दौरान रास्ते में ही उनके भाई की मौत हो गई। सुरेंद्र ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रेन की लाइन बदलने से उनके भाई की जान चली गई। विभाग के लोग समय पर उनके भाई का प्राथमिक उपचार भी नहीं करा सके। रूमाल से सिर बांध कर उन्हें प्रयागराज लाया जा रहा था। ज्यादा खून बहने की वजह से उनके भाई ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बृहस्पतिवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर कानपुर रवाना हो गए।
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