इसके बाद जब बाढ़ के दिनों में रेत में ढंके शवों से रामनामी उधड़कर बाहर आने लगी और शव गंगा में बहते देखे जाने लगे, तब इस पर देश भर में शोर-शराबा मचा था। इसके बाद गंगा तटों पर शवों को दफनाने पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन, इन दिनों शृंग्वेरपुरधाम के भैरव घाट, सीता कुंड घाट, गऊघाट से थोड़ा पहले बने घाट पर तीन महीने के दौरान सौ से अधिक शवों को दफनाया जा चुका है। गंगा तीरे कब्रिस्तान आकार ले रहा है। इससे हर रोज श्रद्धालुओं को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। मानसून का समय नजदीक आने के साथ ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। कहा जा रहा है कि बाढ़ के समय गंगा में दफनाए गए शव बहते नजर आने लगते हैं। इससे बदबू फैलती है।
बाहर से शवों को दफनाने आते हैं लोग
थाना नवाबगंज क्षेत्र में सीता कुंड घाट पर शवों को दफनाया जाना प्रशासन की उदासीनता का नतीजा माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि बाहरी लोग यहां शव दफनाने के लिए अधिक संख्या में आ रहे हैं।
कोरोना काल के बाद भी शवों को दफनाने से रोका गया था, लेकिन अब फिर रेत समाधि दी जा रही है। यह बेहद चिंता का विषय है। इससे सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। - अरुण द्विवेदी अध्यक्ष, शृंग्वेरपुर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट