जमीन के नाम पर कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोपी योगेश तिवारी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कस दिया है। उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही ईडी ने उसकी संपत्तियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
योगेश पर जमीन के नाम पर धोखाधड़ी के कई मामले चल रहे हैं। जॉर्जटाउन, झूंसी, कैंट, कर्नलगंज, फूलपुर, दारागंज और सिविल लाइंस में उसके खिलाफ 45 मुकदमे दर्ज हैं। झूंसी थाने में इफको से रिटायर अधिकारी प्रभाष चंद्र गुप्ता से भी उसने जमीन के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी की थी। जिसकी विवेचना पहले झूंसी और बाद में क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। इसी मामले में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
जांच में यह भी बात सामने आई है कि लोगों से धोखाधड़ी के पैसे से ही उसने सोने-चांदी की दुकान खोली और बाद में कई शराब की दुकानों के लाइसेंस लिए थे। करीब 15 साल से वह जमीन के नाम पर ठगी कर रहा था। ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू करने के लिए उसने सात ट्रक भी खरीदे थे। खास बात यह है कि तमाम शिकायतों के बावजूद वह लगातार पुलिस की नजरों से कई वर्षों तक बचा रहा।
सभी संपत्तियों की हो रही छानबीन
ईडी ने योगेश के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने का आधार उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज धोखाधड़ी व अन्य मुकदमों को बनाया है। आरोप है कि आपराधिक गतिविधियों के जरिए की गई काली कमाई को सफेद करने के लिए उसने अलग-अलग संपत्तियों में निवेश किया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में जांच के दौरान उन लोगों की संपत्तियों की भी जानकारी जुटाई जाएगी, जिन्हें योगेश ने रकम दी या उनके नाम पर चल या अचल संपत्ति में निवेश किया।
दर्ज 70 मुकदमों में चेक बाउंस के 45 मुकदमे
पुलिस के मुताबिक, योगेश पर 70 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से 45 मुकदमे चेक बाउंस के, जबकि जालसाजी, धोखाधड़ी, जानलेवा हमले समेत अन्य आरोपों में 24 मुकदमे दर्ज हैं। जांच में यह भी बात सामने आई थी कि योगेश ने कई लोगों पर फर्जी मुकदमे भी दर्ज कराए, जिनका ब्योरा खंगाला जा रहा है।