Yati Narsinghanand : मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। करीब तीन घंटे तक दोनों तरफ से चली बहस को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। यति नरसिंहानंद का भड़काऊ बयान सोशल मीडिया पर वायरल करने पर जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद में मुकदमा दर्ज किया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद का पैगंबर पर दिये आपत्तिजनक विडियों को वायरल करने के आरोपी पत्रकार मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से छह जनवरी तक जवाबी हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि जुबैर की पोस्ट में भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ क्या है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने जुबैर को अंतरिम राहत देते हुए शर्त लगाई है कि वह विवेचना में सहयोग करेगा और देश छोड़ कर नहीं जाऐगा।
मामला गाजियाबाद का है। जुबैर पर यति नरसिंहानंद सरस्वती ट्रस्ट की महासचिव उदिता त्यागी ने मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को भड़काने के लिए जुबैर ने 3 अक्टूबर को डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद को पैगंबर मोहम्मद के बारे में कथित पुराना भड़काऊ बयान सोशल मीडिया एक्स वायरल किया। उसे पुलिस को भी टैग किया और पूछा कि यति के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
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शिकायतकर्ता ने जुबैर पर डासना देवी मंदिर में यति नरसिंहानंद के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन का भी आरोप लगाया गया है।
जुबैर ने एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। शुक्रवार को करीब दो तीन घंटे चली बहस के दौरान याची के अधिवक्ता ने जुबैर और उदिता त्यागी के बीच हुयी ऑनलाइन चैटिंग का हवाला दिया। कहा कि यह आपराधिक कार्यवाही यति नरसिंहानंद के समर्थकों का पब्लिसिटी स्टंट है। जुबैर पत्रकार है, उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।
वहीं, सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार संड ने कहा कि जुबैर के खिलाफ पहले भी आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट वायरल करने के कई मामले दर्ज है। उसकी एक्स पोस्ट का मकसद न सिर्फ यति नरसिंहानंद के खिलाफ़ हिंसा भड़काना था बल्कि अलगाववादी को भी बढ़ावा देना भी था। उसकी पोस्ट ने भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाया है।