पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंड स्लाइड) से होने वाली जान माल की हानि को बचाने के लिए मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) ने इसरो के साथ मिलकर एक नए साॅफ्टवेयर का खोज किया है। यह साॅफ्टवेयर सेटेलाइट के डाटा का अध्ययन करके लैंड स्लाइड की संभावनाओं को तलाशने का काम करेगा। एमएनएनआईटी के क्षेत्रीय भू-गणित केंद्र के डॉ. रामजी द्विवेदी, इसरो के वैज्ञानिक डॉ. तापस राजन मार्था और शोध छात्र विपिन मौर्या इस प्रोजेक्ट पर वर्ष 2018 से कार्य कर रहे हैं। डॉ. रामजी द्विवेदी ने बताया कि इसरो के साथ मिलकर एक साॅफ्टवेयर बना रहे हैं, जो सेटेलाइट के डाटा का अध्ययन कर लैंड स्लाइड के होने की संभावनाओं को तलाशेगा।
अभी यूरोपियन स्पेस एजेंसी से हमें डाटा प्राप्त हो रहा है, जो कि 12 दिनों के लम्बे अंतराल में मिलता है। जिसके कारण ट्रायल में थोड़ी समस्या आ रही है। उम्मीद है कि जल्द ही निसार से सेटेलाइट का डाटा मिलने लगेगा, जिससे पहाड़ी इलाकों में लैंड स्लाइड की संभावना का अध्ययन करने में गति प्राप्त होगी। निसार नासा और इसरो का एक संयुक्त मिशन है, जो पृथ्वी की सतह की निगरानी के लिए एक रडार इमेजिंग उपग्रह है।