प्रयागराज। मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के हीरक जयंती समारोह में मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने बताया कि वह बीटेक करने वाले एक ऐसे युवक को जानते हैं, जिसने ट्रिपल आईटी प्रयागराज से पढ़ाई पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी और अब विधि के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश बोले कि भले ही वह विधि के क्षेत्र से जुड़े रहे, लेकिन उनकी दोनों बेटियां इंजीनियर हैं। एक ने पेट्रोलियम इंजीनियरिंग तो दूसरी बेटी ने इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में बीटेक की पढ़ाई की। बेटियां जब इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आईं तो उन्हें भी इस बारे में काफी जानकारी हुई।
उन्होंने कहा कि वह दो साल पहले जब इलाहाबाद आए तो इस शहर को संगम, आनंद भवन के साथ एमएनएनआईटी के लिए भी जानते थे। एमएनएनआईटी के हीरक जयंती समारोह पर उन्होंने संस्थान के लोगों को बधाई दी। साथ ही संस्थान की स्मारिका का विमोचन किया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि एवं अन्य लोगों ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। डीन एमएम गोरे ने स्वागत भाषण दिया जबकि रजिस्ट्रार सर्वेश कुमार तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम पूरा होने के बाद सांस्कृतिक आयोजन किए गए, जिसमें संस्थान के छात्र-छात्राओं ने गीत-संगीत के कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
साल भर चलेगा हीरक जयंती समारोह
एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि हीरक जयंती समारोह का आयोजन साल भर किया जाएगा। सभी विभागों से कहा गया है कि वे अपने यहां अकादमिक गतिविधियों की संख्या बढ़ाएं। साइंस, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। साल के अंत में संस्थान अगले पांच, दस या पंद्रह वर्षों के लिए कोई प्लान लेकर आएगा और उस पर पूरी गंभीरता से काम होगा।
केवल 100 छात्रों के साथ शुरू थी पढ़ाई
देश के 17 क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक एमएनएनआईटी की स्थापना दो दिसंबर 1960 को हुई थी और पहला बैच 1961 से शुरू हुआ था। उस वक्त संस्थान में केवल 100 छात्र थे। निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता ने संस्थान की जमीन को अधिग्रहीत करने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति को लखनऊ बुलाया था और कुलपति ने एक ही बात में जमीन देने के लिए हामी भर दी थी। हालांकि कुलपति लौटकर आए तो लोगों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन कुलपति ने कहा कि यह मुख्यमंत्री की सहजता थी कि उन्होंने जमीन अधिग्रहण के लिए आग्रह किया। अगर वह चाहते तो जमीन सीधे अधिग्रहीत कर सकते थे।