हमीदिया में हुए कार्यक्रम में बोले कुलपति प्रो. हांगलू
उर्दू दिवस पर सात दिवसीय कार्यक्रम का हुआ समापन
प्रयागराज। मिर्जा गालिब अवाम और खास दोनों के शायर थे। वह एक शायर नहीं, बल्कि संस्था थे जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए सबक हैं और वह हर युग के लिए प्रासंगिक भी हैं। यह बात इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने हमीदिया गर्ल्स डिग्री कॉलेज में उर्दू दिवस पर आयोजित सात दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर कही।
शायर मिर्जा गालिब को समर्पित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. हांगलू ने कहा कि गालिब का ग्रंथ भारतीय संस्कृति को चित्रित करता है। गालिब के दीवान का भारत की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए, क्योंकि यह दीवान एक बहुत बड़ी हिंदुस्तानी तहजीब है और किसी मजहबी किताब से कम नहीं है। गालिब ने निरंतर खोज से उर्दू कविता को आधुनिक विषयों के साथ पुनर्जीवित किया और उनकी प्रतिभा ने गजल को नई उचाइयों एवं गहराइयों तक पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि उर्दू एक बेहतरीन जबान है और जबानें अपने आपको को आगे बढ़ती हैं। कुलपति ने गालिब के कपलेट्स का उद्घाटन किया, जो उर्दू कैलोग्राफी सेंटर द्वारा आयोजित था। गालिब के कपलेट्स का संग्रह ‘शोखी तहरीर’ जो कि उर्दू कैलोग्राफी की छात्राओं द्वारा लिखा गया था, इसका विमोचन भी किया। साथ ही उर्दू जनरल नक्श-ए-नव सत्र 2018-19 का विमोचन किया। उन्होंने मेधावी छात्राओं को मेडल भी प्रदान किए।
इविवि में उर्दू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. फातमी ने गालिब के काम को रेखांकित किया और कहा कि वह मानवता के शायर थे। उनका दष्टिकोण वैचारिक एवं वैज्ञानिक था। प्रो. आनंद शंकर सिंह, प्रो. शबनम हमीद ने भी गालिब पर अपनी बात रखी। हमीदिया की मैनेजर तजीन एहसाउल्ला मेहमानों का स्वागत किया। इस मौके पर प्राचार्य यूसुफा नफीस, जरीना बेगम, नासेहा उस्मानी आदि उपस्थित रहीं।
Mirza Ghalib Urdu Shayar- फोटो : CITY DESK
Mirza Ghalib Urdu Shayar- फोटो : CITY DESK