चिकित्सक दे रहे हार्मोनल थिरेपी
चिकित्सकों ने बताया कि यह एंड्रोजन इन सेंसिटिविटी सिंड्रोम (एंड्रोजन असंवेदनशीलता सिंड्रोम) नामक दुर्लभ बीमारी है। ऐसे में लड़की की काउंसलिंग मनोरोग विभाग में की गई। यहां पर लड़की ने कहा कि उसका लालन-पोषण लड़की की तरह से हुआ है और वह मानसिक तौर पर लड़की ही है। अब आगे भी वह लड़की ही बनकर रहना चाहती है। परिजनों ने भी इस पर सहमति जताई।
ऐसे में चिकित्सकों ने दूरबीन विधि से किशोरी के पेट से दोनों अविकसित अंडकोष को आपरेशन से बाहर निकाल दिया ताकि आगे चलकर कैंसर का खतरा न पनपने पाए। अब किशोरी को वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनुभा श्रीवास्तव की तरफ से हार्मोनल थेरेपी दी जा रही है। यह थेरेपी आजीवन चलती रहेगी। वहीं किशोरी को बता दिया गया है कि बच्चेदानी न होने की वजह से वह कभी गर्भवती नहीं हो सकेगी।
चिकित्सक बोले- यह दुर्लभ बीमारी
एंड्रोजन असंवेदनशीलता सिंड्रोम (एआईएस) एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें शरीर पुरुष हार्मोन एंड्रोजन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं करता है। इससे उन व्यक्तियों का आनुवंशिक रूप से पुरुष (एक्स वाई गुणसूत्र) होने के बावजूद बाहरी शारीरिक लक्षण अक्सर महिलाओं वाले होते हैं। एआईएस के दो मुख्य प्रकार हैं- पूर्ण और आंशिक, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर एंड्रोजन के प्रति कितनी प्रतिक्रिया करता है।
यह काफी दुर्लभ बीमारी होती है। इसमें शरीर लड़की का होता है मगर गुण लड़के के होते हैं। फिलहाल किशोरी और परिजनों की सहमति से लड़की के पेट से अविकसित अंडकोष को बाहर निकाल लिया गया है। इसके अलावा मरीज को हार्मोनल थेरेपी दी जा रही है। लड़की गर्भवती नहीं हो सकती है। बाकी उसका जीवन सामान्य लड़कियों की तरह रहेगा। - डॉ. श्रीश मिश्रा, यूरोलॉजी विभाग, एसआरएन अस्पताल।