जिला न्यायालय ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को जुड़वा गर्भ समापन की अनुमति दे दी। कहा कि किसी महिला को अपने शरीर संबंधी मामलों में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
जिला न्यायालय ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को जुड़वा गर्भ समापन की अनुमति दे दी। कहा कि किसी महिला को अपने शरीर संबंधी मामलों में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। नाबालिगों और अवांछित गर्भावस्था के मामलों में इस अधिकार पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाए जा सकते।
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यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू कनौजिया ने दिया। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता सात सप्ताह की गर्भवती थी। जिला महिला चिकित्सालय के रेडियोलॉजी एवं अल्ट्रासाउंड विभाग की ओर से 19 मार्च 2026 को किए गए परीक्षण में जुड़वा (ट्विन) गर्भ की पुष्टि हुई थी।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पीड़िता के परिवारवालों ने नौ मई 2026 को ही विवेचक को जानकारी दे दी थी, लेकिन गर्भ समापन को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने कहा कि पीड़िता की परिस्थितियों को देखते हुए गर्भ समापन की अनुमति देना न्यायोचित और आवश्यक है।