रामपुर के विलासपुर से विधायक और प्रदेश के सिंचाई तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख ने अपने अधिवक्ता के जरिए हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दी है कि वह भविष्य में ऐसी गलती नहीं करेंगे। मंत्री ने यह अंडरटेकिंग इस आरोप के बाद दिया है कि जिसमें कहा गया है कि एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए उन्होंने क्राइम ब्रांच के दरोगा पर दबाव डाला और बाद में उसको लाइन हाजिर करवा दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में मंत्री को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। कोर्ट ने आदेश की प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजने का निर्देश दिया था।
इससे पूर्व मुख्य सचिव और मंत्री बलदेव की सिंह की ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया। मुख्य सचिव ने बताया कि प्रकरण मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है। बलदेव सिंह का कहना था कि जनप्रतिनिधि होने के कारण उन्होंने दरोगा को फोन किया था। एफआर लगाने के लिए दबाव नहीं डाला।
रामपुर के नृपेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की पीठ ने सोमवार को इस मामले की जांच क्षेत्राधिकारी को सौंप दी है। कोर्ट के आदेश पर दरोगा राजेंद्र प्रसाद को वापस क्राइम ब्रांच में भेज दिया गया है। याची के अधिवक्ता सुशील तिवारी का कहना था कि याची ने गेहूं काटने की मशीन कंबाइन हार्वेस्टर खरीदी थी। वर्ष 2011 में उसकी पत्नी के भाई वह मशीन कुछ दिनों के लिए उधार मांग कर ले गए मगर मशीन लौटाई नहीं। मशीन वापस मांगने पर वापस नहीं की। याची की पत्नी भी भाइयों की ओर हो गई और उसे छोड़कर मायके चले गई। दोनों के बीच पारिवारिक विवाद का मुकदमा दर्ज हो गया।
याची ने भी अपनी पत्नी के भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसमें दूसरे पक्ष ने जांच अधिकारी से सांठगांठ कर फाइनल रिपोर्ट लगवा दी। याची की शिकायत पर डीआईजी ने जांच क्राइम ब्रांच के दरोगा राजेंद्र प्रसाद को सौंप दी। राजेंद्र प्रसाद जांच कर रहे थे तभी पांच अप्रैल 2017 को मंत्री बलदेव सिंह ने उनको फोन कर इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए कहा। दरोगा ने मंत्री की बात फोन पर रिकार्ड कर ली और उसे केस डायरी में भी अंकित कर दिया। इसकी जानकारी होने पर 10 अप्रैल को राजेंद्र प्रसाद को लाइन हाजिर कर दिया गया। याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।