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हाईकोर्ट: रिहा होने मात्र से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती, उम्रकैद की सजा पाए शिक्षक को वेतन देने पर डीआईओएस तलब

Wed, 26 Aug 2026 07:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के सिकंदरपुर स्थित श्री व्यंतानंद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तैनात उम्रकैद की सजा पाए सहायक अध्यापक के वेतन भुगतान मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के सिकंदरपुर स्थित श्री व्यंतानंद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तैनात उम्रकैद की सजा पाए सहायक अध्यापक के वेतन भुगतान मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने विद्यालय प्रबंधन की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत पर रिहा होने मात्र से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती। डीआईओएस को यह जांचना होगा कि संबंधित शिक्षक को वेतन पाने का कानूनी अधिकार है या नहीं।

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मामला सहायक अध्यापक सुधाकर शुक्ला से जुड़ा है। उन्हें हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में 15 जुलाई 2015 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उनकी आपराधिक अपील हाईकोर्ट में लंबित है। करीब 13 साल की वास्तविक और छूट समेत 14 साल की सजा काटने के बाद हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को उसे जमानत पर रिहा किया था। हालांकि, जमानत देते समय उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई गई थी।

आरोप पत्र और कारण बताओ नोटिस नहीं किया गया था जारी

विद्यालय प्रबंधन ने 14 मार्च 2026 के डीआईओएस के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत सुधाकर समेत अन्य कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए वेतन खाते के एकल संचालन की अनुमति दी गई थी। प्रबंधन का कहना था कि जमानत मिलने से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती और सेवा पर दोषसिद्धि के परिणाम बने रहते हैं। दूसरी ओर शिक्षक की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही, आरोपपत्र या कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है।

कोर्ट ने कहा कि यह जांचना आवश्यक है कि दोषसिद्धि पर किसी सक्षम न्यायालय ने रोक लगाई है या नहीं। डीआईओएस को विद्यालय, शिक्षा विभाग और संबंधित न्यायालयों के रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से जांच करने का आदेश दिया गया है। जांच में शिक्षक की नियुक्ति और सेवा संबंधी मूल अभिलेख, अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों, आपराधिक मामले की जानकारी मिलने के बाद विद्यालय प्रबंधन की ओर से की गई कार्रवाई, दोषसिद्धि के बाद वेतन भुगतान के आधार की भी पड़ताल की जाएगी।

72 घंटे में सौंपने होंगे सेवा अभिलेख

हाईकोर्ट ने विद्यालय प्रबंधक को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सेवा अभिलेख व नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज डीआईओएस को सौंपने का आदेश दिया है। डीआईओएस इन अभिलेखों को लिखित सूची के साथ अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रखेंगे।

तत्कालीन डीआईओएस को व्यक्तिगत रूप से तलब

मामले में एकल संचालन की अनुमति देने वाले तत्कालीन डीआईओएस देवेंद्र कुमार गुप्ता को अगली सुनवाई पर संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि उन्होंने किस परिस्थिति में और किस कानूनी अधिकार के तहत आदेश पारित किया था।
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माध्यमिक शिक्षा निदेशक से भी हलफनामा तलब

माध्यमिक शिक्षा निदेशक, उत्तर प्रदेश को भी राज्य सरकार की अनुमति लेकर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। इसमें दोषसिद्ध कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, प्रबंधन और शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी तथा वेतन भुगतान और वेतन खाते के एकल संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी देनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनकी अंतरिम टिप्पणियां शिक्षक की नियुक्ति, सेवा में बने रहने या 14 मार्च 2026 के डीआईओएस के आदेश की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को दोपहर दो बजे होगी।

खाते का एकल संचालन

खाते का एकल संचालन एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसमें प्रबंधन के विवाद पर विद्यालय या संस्थान के वेतन खाते को संचालित करने का अधिकार संयुक्त हस्ताक्षर के बजाय केवल एक प्राधिकृत अधिकारी को दिया जाता है।
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