कुंभ भ्रमण के लिए आए विदेशी प्रतिनिधियों के लिए शुक्रवार का दिन यादगार रहा। कुंभ क्षेत्र हर स्थल देख वे आश्चर्यचकित थे। मेहमानों ने इसे कभी न भूलने वाला पल बताया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल शिक्षाविदों को शोध का विषय मिला तो हांगकांग के फिल्म कलाकार ने भी कुंभ आयोजन में उम्मीदें तलाशीं। इटली के युनिवर्सिटी आफ सैनमरीनो में अर्थशास्त्री की प्रोफेसर कैरेन वैंटरीन पूर्व में भी भारत आ चुकी हैं।
वह इंडियन इंस्टीटयूट साइंस में बतौर विजिटिंग प्रोफेसर आई थीं। उन्होंने बताया कि कुंभ में आकर बहुत कुछ जानने को मिला। इससे अध्ययन में मदद मिलेगी। हांगकांग से आए कलाकार जैकी आमिर खान के फैन हैं तथा सोनू सूद के मित्र। उन्होंने बताया कि वह 15 से अधिक फिल्मों में काम चुके हैं। जैकी ने कुंभ भ्रमण को अद्भुत और हमेशा याद रहने वाला पल बताया। इजराइल के एलदाद सेला का कहना था कि पहली बार भारत के प्रधानमंत्री ने वहां का दौरा किया और कुंभ के लिए आमंत्रित किया। हम भारत के प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हैं। प्रतिनिधिमंडल में शामिल फिलिस्तीन के अनवर जयोसी ने कहा कि भारत गांधी का देश है और गांधी हमारे दिल में बसते हैं। चेन्नई से ही स्नातक की पढ़ाई करने वाले अनवर ने भारत से मदद की भी अपील की। डेनमार्क की शैरलो तो पूरी तरह से भारतीय रंग में डूब चुकी थीं।
उन्होंने कुंभ भ्रमण के लिए खास साड़ी खरीदी थी। चार्ड रिपब्लिक के इदरिश ने आयोजन को अतुलनीय और अकल्पीय बताया। वह हिंदी भाषा के प्रचार में लगे हैं। इसी सिलसिले में पहले भी वह भारत आ चुके हैं लेकिन प्रयागराज पहली बार आना हुआ। पेरिस के डैनियन वेजेस हिंदी, उर्दू, तिब्बती समेत कई भाषाओं पर काम कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वह एक दिन पहले ही आग गए थे। उन्होंने कहा कि भारत बहुत प्रशंसा वाला देश है। अतिथि देव का अर्थ यहां आकर समझ में आया। उनका कहना था, ‘मैंने इस देश की धरती को चूमा और यादें जेहन में लेकर जा रहा हूं।’ भारतीय परंपरा से रूबरू सुडान के मॉजेज जॉन, दक्षिण कोरिया के हैवलॉन कू आदि भी कुंभ की भव्यता और भारतीय परंपरा को देख मुग्ध रहे।
प्रयागराज। विदेशी मेहमानों के लिए खाना भी देसी अंदाज वाला रहा। इसमें कुछ विदेशी नाम वाले डिश भी शामिल किए गए थे। अरैल घाट स्थित त्रिवेणी शंकुल में उन्हें दमआलू के संग रशियन सलाद भी परोसा गया। उनके लिए खाने का इंतजाम यहीं के एक होटल की ओर से किया गया था। इसमें अदरकी गोभी मटर, शाही पनीर, चना मसाला, दाल तड़का, मटर पुलाव, मंदूरी रोटी, गार्लिक नान, लच्छा पराठा, पनीर का विशेष डिश ग्रिल्ड कॉटेज चीज, साउटेड वेजेटेबल, मेक्शियल राइस, मिक्स रायता, गुलाब जामुन, गाजर का हलवा आदि व्यंजन शामिल रहें। इनके अलावा तरह-तरह के जूस भी रहे।
विदेशियों के स्वागत में मेला क्षेत्र में जगह-जगह यातायात प्रतिबंधित रहा। इसकी वजह से धनुपुर के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से आए बच्चे कई किलोमीटर की दूरी पैदल चलने से हलकान रहे। इसके बावजूद उन्हें सांस्कृतिक एवं कला ग्राम में जाने नहीं दिया गया। इससे उनमें निराशा भी रही। धनुपुर के चंदापुर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों के साथ आए 22 विद्यार्थी अरैल स्थित सांस्कृतिक ग्राम के पास भटकते रहे लेकिन उन्हें भीतर नहीं जाने दिया गया। उनके वाहन को छतनाग के पास ही रोक दिया गया था तथा प्लांटून पुल पैदल पार करके पहुंचे थे। बच्चों ने अफसराें का मन्नौवल किया लेकिन उन्हें ले जाने के लिए भी वाहन को नहीं आने दिया गया। ऐसे में पैदल ही वापस हुए। इससे उनमें निराशा रही। इस तरह की समस्याओं से कई अन्य विद्यालयाें के बच्चे तथा स्नानार्थी परेशान हुए।