जहां तक कैंसर के कारणों की बात करें तो सिर्फ तंबाकू, शराब आदि ही नहीं बल्कि कई बार ओवन में गर्म किया हुआ खाने, पैक्ड फूड, प्रिजर्वेटिव खाद्य पदार्थ से भी मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों के होने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इनसे स्तन कैंसर, पेट के कैंसर सहित अन्य कैंसर होने की संभावना बनी रहती है।
लेकिन, अगर शुरुआती स्तर पर ही कैंसर का पता चल जाता है तो रेडियो थेरेपी से इसका कारगर इलाज संभव है। इस समय रेडियोथेरेपी की एडवांस मशीनें उपलब्ध हैं, जो कैंसर के इलाज में बेहतर साबित हो रही हैं। मरीजों के इलाज की बात करें तो तकरीबन 60 से 70 फीसदी कैंसर मरीजों में रेडियोथेरेपी का प्रयोग करना ही होता है। इसके अलावा सर्जरी, कीमो थेरेपी से भी इलाज होता है।
पेट सीटी स्कैन की सुविधा लखनऊ के बाद पूर्वांचल में वाराणसी के एपेक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में उपलब्ध है। यहां पर आयुष्मान कार्ड धारकों की नि:शुल्क जांच और इलाज संभव है। इसके अलावा सीएम फंड से भी जरूरतमंदों का नि:शुल्क इलाज होता है। कैंसर की आधुनिक इलाज पद्धति से मुख, स्तन, बच्चेदानी का कैंसर ठीक हो सकता है और मरीज सामान्य जीवन बिता सकता है।
डॉ. सोनिया तिवारी, कैंसर रोग विशेषज्ञ
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रेडिएशन थेरेपी का नहीं होता शरीर पर दुष्प्रभाव
कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल की कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.सोनिया तिवारी का दावा है कि रेडिएशन थेरेपी का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। रेडिएशन से कैंसर को ठीक किया जा सकता है। खासतौर पर मुख, गले, ब्रेस्ट, सर्वाइकल कैंसर का इलाज प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। इससे दो से तीन मिलीमीटर तक के कैंसर कोआसानी से ठीक किया जा सकता है।
आईएमए के नेशनल कांफ्रेस में कैंसर के इलाज के बारे में चर्चा के दौरान डॉ.सोनिया बोलीं, शरीर पर कीमो के मुकाबले रेडिएशन थेरेपी का असर कम होता है। इसकी वजह से जो साइड इफेक्ट दिखते भी हैं, उन्हें दवाओं से पांच से छह सप्ताह में ठीक किया जा सकता है। एडवांस स्टेज के कैंसर में भी रेडिएशन थेरेपी काफी प्रभावी है। बीते कई वर्षों में कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जिले में मुख, गले, स्तन, पित्त की थैली और सर्वाइकल कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण खान-पान में असावधानी, गलत जीवन शैली आदि हैं।