इलाहाबाद (ब्यूरो)। तथ्य छिपाकर एक ही मामले में दो याचिकाएं दाखिल करने के मामले में हाईकोर्ट ने माया प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आलोक मित्रा और उनके पैरोकार एसके भट्टाचार्या पर एक लाख रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया है। माया प्रेस की याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने आदेश दिया है कि प्रेस पर बकाया कर्मचारी भविष्य निधि के 70 लाख रुपये वसूल लिए जाएं।
सहायक क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त को वसूली की कार्यवाही तीन सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया है। निदेशक ने भविष्य निधि की वसूली के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट को आश्वासन दिया था कि धनराशि जमाकर दी जाएगी इसलिए वसूली की कार्यवाही रोक दी जाए। इसके बाद भी प्रेस ने रकम नहीं जमा की और वसूली से बचने के लिए दोबारा हाईकोर्ट मेें याचिका दाखिल कर दी।
कोर्ट ने कहा कि पूर्व में पारित आदेश और याची द्वारा स्वयं दिए आश्वासन के बाद उसका पालन न करके दोबारा याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई मानते हुए याची पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाने के साथ ही मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया है।